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GPM जिले में कॉलेज और उच्च शिक्षा के विकल्प

GPM जिले में कॉलेज और उच्च शिक्षा के विकल्प: सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में उच्च शिक्षा के लिए डॉ. भँवर सिंह पोर्ते महाविद्यालय (पेंड्रा), वीरांगना रानी दुर्गावती महाविद्यालय (मरवाही), शासकीय पॉलिटेक्निक और जिला लाइवलीहुड कॉलेज जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। जानें प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, छात्रवृत्ति और NEP 2020 के तहत नई शिक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी।
GPM जिले के स्कूल: सरकारी और निजी

GPM जिले के स्कूल: सरकारी और निजी | सम्पूर्ण जानकारी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में 844 शालाओं का विशाल नेटवर्क है जिसमें सरकारी, निजी, स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम, एकलव्य आवासीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शामिल हैं। जानें इस आदिवासी बहुल जिले की शिक्षा व्यवस्था, प्रवेश प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी।
GPM क्षेत्र की लोक कला, संगीत और नृत्य

GPM क्षेत्र की लोक कला, संगीत और नृत्य: एक सांस्कृतिक धरोहर की अनमोल झलक

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला छत्तीसगढ़ की गोंड और बैगा जनजातियों की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है। करमा नृत्य, रीना-सैला, सुआ नृत्य, गोदना कला और माड़ई उत्सव जैसी अनमोल परंपराएँ इस क्षेत्र को भारत के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशेष स्थान दिलाती हैं। जानें GPM की लोक कला, संगीत और नृत्य की पूरी कहानी।
मरवाही क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और परंपराएं

मरवाही क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और परंपराएं

मरवाही में बैगा और गोंड जनजातियाँ सदियों से मैकल पहाड़ियों के जंगलों में रहती आई हैं। 2023 में GPM के 19 बैगा गाँवों को FRA के तहत आवास अधिकार मिले। गोदना कला और बेवार खेती इनकी अनूठी पहचान है।

पेंड्रा और आसपास के मंदिर व पवित्र स्थल

पेंड्रा और आसपास के मंदिर व पवित्र स्थल

पेंड्रा (GPM जिला) के आसपास के पवित्र स्थल धार्मिक विविधता का एक अनूठा संगम हैं। 12वीं सदी का ज्वालेश्वर धाम, 51 टन शिवलिंग वाला अमरेश्वर महादेव, नर्मदा से जुड़ी माई की मड़प, कबीर-नानक मिलन का कबीर चबूतरा और छत्तीसगढ़ की एकमात्र जैन शैल-प्रतिमा बेनीबाई — सभी पेंड्रा से एक दिन की यात्रा में देखे जा सकते हैं।

GPM जिले में मनाए जाने वाले स्थानीय त्योहार

GPM जिले में मनाए जाने वाले स्थानीय त्योहार

GPM जिले में 57.09% आदिवासी जनसंख्या के साथ गोंड और बैगा जनजातियों के पर्व — हरेली (कृषि-आरंभ), करमा (प्रकृति पूजा), नवाखानी (नई फसल), पोला (बैल पूजन) और मड़ई (जनजातीय मेला) — यहाँ की संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।

GPM जिले में जल स्रोत और नदियां

GPM जिले में जल स्रोत और नदियां

GPM जिला छत्तीसगढ़ का वह अनोखा क्षेत्र है जहाँ से मनियारी नदी अचानकमार के जंगलों से निकलती है, और जहाँ अमरकंटक के पठार से नर्मदा, जोहिला और सोन जैसी महान नदियों का उद्गम होता है।

GPM जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल

GPM जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल जिन्हें आपको जानना चाहिए

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला धार्मिक विविधता का एक अद्भुत संगम है। यहाँ 12वीं सदी के कलचुरी काल का ज्वालेश्वर धाम, 51 टन के विशाल शिवलिंग वाला अमरेश्वर महादेव, छत्तीसगढ़ की एकमात्र ~25 फीट ऊँची जैन तीर्थंकर प्रतिमा (बेनीबाई), और संत कबीर-गुरु नानक की भेंट के साक्षी कबीर चबूतरा जैसे अनेक पवित्र स्थल हैं।

Gaurela–Pendra–Marwahi में जलवायु और मौसम का पैटर्न

Gaurela–Pendra–Marwahi में जलवायु और मौसम का पैटर्न

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला छत्तीसगढ़ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में लगभग 617–618 मीटर की ऊँचाई पर बसा है। मैकल पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित होने के कारण यहाँ की जलवायु छत्तीसगढ़ के मैदानी जिलों से काफी अलग और ठंडी है। Köppen वर्गीकरण के अनुसार यह क्षेत्र आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय, शुष्क शीतकाल (Cwa) जलवायु क्षेत्र में आता है।

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