छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले की पहचान सिर्फ इसकी पहाड़ियों, जंगलों और खेती तक सीमित नहीं है। इस जिले की रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था को असल में गति देते हैं इसके छोटे व्यवसाय और स्थानीय बाजार। यहां के हर गांव, कस्बे और साप्ताहिक हाट बाजार में हजारों परिवार छोटी दुकानों, हस्तशिल्प, कृषि उपज की बिक्री और सेवा कार्यों से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
इस लेख में हम जानेंगे कि जीपीएम जिले में छोटे व्यवसाय किस तरह काम करते हैं, यहां के प्रमुख बाजार कौन से हैं, और इन्हें आगे बढ़ाने में सरकार की क्या भूमिका है।
विषय सूची
जिले की आर्थिक बनावट को समझें
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का गठन 10 फरवरी 2020 को बिलासपुर जिले को विभाजित करके किया गया था। यह छत्तीसगढ़ का 28वां जिला बना और इसका मुख्यालय गौरेला है। यह जिला छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है और मुख्य रूप से पहाड़ी तथा जंगली इलाका है।
जिले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की अधिकतर आबादी गांवों में रहती है। शहरी आबादी सिर्फ 9.60 प्रतिशत है, यही वजह है कि यहां बड़े शोरूम या मॉल की जगह छोटी दुकानें, साप्ताहिक हाट बाजार और घरेलू उद्यम ही आम आदमी की जरूरतें पूरी करते हैं।
जिले की एक झलक
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| स्थापना दिनांक | 10 फरवरी 2020 |
| जिला मुख्यालय | गौरेला |
| क्षेत्रफल | 2307.39 वर्ग किलोमीटर |
| कुल जनसंख्या (जनगणना 2011) | 3,36,420 |
| तहसील | 3 |
| विकासखंड (ब्लॉक) | 3 |
| नगर पंचायत | 2 |
| ग्राम पंचायत | 166 |
| कुल गांव | 223 |
| शहरी जनसंख्या | 9.60% |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 57.09% |
| अनुसूचित जाति (SC) | 6.18% |
| साक्षरता दर | 55.92% |
जिले की सीमा उत्तर में कोरिया जिले की मनेंद्रगढ़ तहसील, पूर्व में कोरबा जिले की कटघोरा तहसील, दक्षिण में बिलासपुर और मुंगेली जिले, तथा पश्चिम में मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से लगती है। इतने बड़े दायरे में फैले गांवों और कस्बों के बीच व्यापार को जोड़ने का काम स्थानीय बाजार ही करते हैं।
साप्ताहिक हाट बाजार — जिले की व्यापारिक जीवनरेखा
छत्तीसगढ़ के ज्यादातर आदिवासी बहुल जिलों की तरह जीपीएम में भी साप्ताहिक हाट बाजार व्यापार की रीढ़ हैं। सप्ताह के किसी एक तय दिन किसी गांव या कस्बे में बड़ा बाजार लगता है, जहां आसपास के दर्जनों गांवों के किसान, दुकानदार और खरीदार इकट्ठा होते हैं।
इन बाजारों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां बिचौलियों के बिना सीधे किसान और ग्राहक के बीच खरीद-बिक्री होती है, जिससे दोनों पक्षों को उचित दाम मिलता है।
जिले के प्रमुख बाजार
| क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|
| गौरेला | जिला मुख्यालय, नगर पंचायत, रोजाना खुलने वाली दुकानों और स्थायी व्यापारिक प्रतिष्ठानों का केंद्र |
| पेंड्रा | नगर पंचायत, अनाज, कपड़ा, सर्राफा और जरूरी सामान का बड़ा व्यापारिक केंद्र |
| कोटमीकला (कोटमी) | पेंड्रा के पास, मंगलवार को लगने वाला जाना-माना साप्ताहिक हाट — अनाज, सर्राफा और रोजमर्रा के सामान के लिए प्रसिद्ध |
| मरवाही | तहसील मुख्यालय, स्थानीय कृषि उपज और दैनिक जरूरत के सामान का प्रमुख बाजार |
इन बाजारों में अनाज, सब्जी, कपड़ा, बर्तन, बांस के बने घरेलू सामान, वनोपज, पशुधन और मौसमी फल जैसे महुआ व चिरौंजी तक बिकते हैं।
GPM जिले का साप्ताहिक हाट बाजार — जहां स्थानीय किसान और आदिवासी महिलाएं सीधे ग्राहकों को अनाज, सब्जी और वनोपज बेचती हैं
गांव-कस्बों में चलने वाले छोटे व्यवसायों के प्रकार
जीपीएम जिले में छोटे व्यवसाय बहुत विविध हैं। नीचे दिए गए व्यवसाय जिले के लगभग हर गांव और कस्बे में देखने को मिलते हैं:
- किराना और परचून की दुकानें
- कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट की दुकानें
- मेडिकल स्टोर और जनरल स्टोर
- चाय और नाश्ते की छोटी दुकानें, ढाबे
- आटा चक्की और छोटी राइस मिल
- मोबाइल रिपेयरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें
- हार्डवेयर और निर्माण सामग्री की दुकानें
- सिलाई-कढ़ाई और टेलरिंग का काम
- वेल्डिंग, लोहार और बढ़ई का काम
- मोटर गैरेज और साइकिल-बाइक रिपेयरिंग
- सैलून और ब्यूटी पार्लर
- सब्जी और फल विक्रेता
- पशुपालन आधारित छोटे व्यवसाय, दूध और डेयरी उत्पाद
ये सभी व्यवसाय बहुत कम पूंजी में शुरू होते हैं और परिवार के सदस्य मिलकर इन्हें चलाते हैं।
GPM जिले की एक स्थानीय किराना दुकान — जहां रोजमर्रा की जरूरतें कम पूंजी में पूरी होती हैं
महिला स्व-सहायता समूह — छोटे व्यवसाय की नई ताकत
पिछले कुछ वर्षों में जीपीएम जिले में महिलाओं के स्व-सहायता समूहों ने छोटे व्यवसाय के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जिले में वर्तमान में 6,010 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों को औसतन ₹1,92,000 प्रति समूह का ऋण उपलब्ध कराया गया है।
लखपति दीदी अभियान में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले को 10,124 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य मिला था, जिसके मुकाबले अब तक 9,095 महिलाएं (लगभग 90%) यह लक्ष्य हासिल कर चुकी हैं।
विष्णुभोग चावल — महिला समूहों की सफलता की मिसाल
जीपीएम जिले की सुगंधित विष्णुभोग धान की किस्म अब जिले की खास पहचान बन चुकी है। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं इस चावल का उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन खुद कर रही हैं और इसे "अरपा-बिहान विष्णुभोग" ब्रांड के नाम से बेच रही हैं। इस साल 250 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में विष्णुभोग धान का उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है।
GPM जिले की महिला स्व-सहायता समूह की सदस्याएं विष्णुभोग चावल की पैकेजिंग करते हुए — "अरपा-बिहान विष्णुभोग" ब्रांड की सफलता की कहानी
वन आधारित छोटे व्यवसाय और आजीविका
जीपीएम जिले में अनुसूचित जनजाति की आबादी 57.09 प्रतिशत है और यहां गोंड व बैगा जैसी जनजातियां बड़ी संख्या में रहती हैं। इस वजह से जंगल पर आधारित छोटे व्यवसाय जिले की आजीविका का अहम हिस्सा हैं।
- तेंदूपत्ता संग्रहण: वर्ष 2026 के लिए संग्रहण दर ₹5.50 प्रति गड्डी, हजारों परिवारों को मौसमी रोजगार।
- लघु वनोपज संग्रहण: न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत सालबीज, महुआ, इमली, कोदो और माहुल पत्ता की खरीद तय दरों पर।
- बांस और हस्तशिल्प: गोंड और बैगा समुदाय के कारीगर बांस से टोकरी, सूपा और घरेलू सामान बनाकर हाट बाजारों में बेचते हैं।
GPM जिले के गोंड आदिवासी कारीगर बांस से टोकरी, सूपा और घरेलू सामान बनाते हुए — वन आधारित आजीविका का एक जीवंत उदाहरण
व्यापार को सहयोग देने वाली सरकारी योजनाएं
- पीएम स्वनिधि योजना: नगर पंचायत क्षेत्रों में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण।
- विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): हर ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष ₹2 करोड़ की राशि।
- छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान): महिला SHG को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराना।
- उद्यम पंजीकरण और जीईएम पोर्टल: छोटे उद्यमों को औपचारिक पहचान और सरकारी ई-मार्केटप्लेस तक पहुंच।
व्यापार को मिलती मदद — सड़क, रेल और पर्यटन
जीपीएम जिले का पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन (गौरेला) दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग पर स्थित है और यह इस रेलवे जोन का सबसे ऊंचा स्टेशन है। यह रेल संपर्क जिले के व्यापारियों को कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पाद बाहर भेजने में मदद करता है।
देश की पवित्र नदी नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक गौरेला से केवल करीब 26 किलोमीटर दूर है। हर साल यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की वजह से होटल, ढाबे, प्रसाद व पूजन सामग्री की दुकानें और हस्तशिल्प के स्टॉल जैसे छोटे व्यवसाय फल-फूल रहे हैं।
गौरेला से करीब 23 किलोमीटर दूर स्थित धनपुर गांव प्राचीन काल में जैन धर्म से जुड़ा एक बड़ा व्यापारिक केंद्र हुआ करता था, यह दर्शाता है कि यह क्षेत्र सदियों से व्यापार और आदान-प्रदान का केंद्र रहा है।
छोटे व्यवसायियों के सामने चुनौतियां
- पहाड़ी और वनक्षेत्र होने के कारण कई गांवों तक सड़क संपर्क सीमित, माल ढुलाई महंगी
- बैंकिंग सुविधा और औपचारिक ऋण तक पहुंच में कठिनाई
- वनोपज और कृषि उपज का व्यापार मौसम पर निर्भर, आय अनियमित
- ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बड़े बाजार तक पहुंच के लिए तकनीकी जानकारी की कमी
भविष्य की संभावनाएं
जिले में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रियता, विष्णुभोग चावल जैसे स्थानीय ब्रांड की सफलता और अमरकंटक जैसे पर्यटन स्थल की नजदीकी से आने वाले वर्षों में छोटे व्यवसायों के और मजबूत होने की उम्मीद है। यदि सड़क संपर्क, डिजिटल भुगतान और बाजार लिंकेज पर काम जारी रहा, तो जीपीएम के स्थानीय उत्पाद प्रदेश और देश के बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
निष्कर्ष
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की अर्थव्यवस्था की असली ताकत इसके छोटे व्यवसाय और स्थानीय बाजार हैं। साप्ताहिक हाट बाजारों से लेकर महिला स्व-सहायता समूहों तक, और वनोपज संग्रहण से लेकर विष्णुभोग चावल जैसे स्थानीय ब्रांड तक, यह जिला दिखाता है कि छोटे स्तर के व्यापार से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। सरकारी योजनाओं का सही लाभ और बेहतर बाजार संपर्क मिलने पर जीपीएम के छोटे व्यवसायी आने वाले समय में जिले की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दे सकते हैं।