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मरवाही क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और परंपराएं

मरवाही क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और परंपराएं

मरवाही, GPM जिले की तीन तहसीलों में से एक, मैकल पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा वह क्षेत्र है जहाँ सदियों पुरानी जनजातीय संस्कृति आज भी जीवंत है। यहाँ बैगा और गोंड — भारत की दो प्राचीनतम जनजातियाँ — जंगल, नदी और पहाड़ के साथ एक ऐसे रिश्ते में जीती हैं जो किसी भी आधुनिक इंसान को आश्चर्यचकित कर दे। बैगा जनजाति को 'जादूगर-वैद्य' कहा जाता है और वे मानते हैं कि जंगल उनसे अलग नहीं है — वे जंगल का हिस्सा हैं।

 

एक नज़र में — मुख्य आँकड़े

 

57.09%

GPM जिले में अनुसूचित जनजाति (2011)

89,744

छत्तीसगढ़ में बैगा जनसंख्या (2011)

19 गाँव

GPM में बैगा आवास अधिकार (2023)

6,483

लाभान्वित लोग, 2,085 परिवार (2023)

 

1. मरवाही क्षेत्र और उसकी जनजातियाँ

मरवाही तहसील GPM जिले के दक्षिणी भाग में है। The Lost Lander (अक्टूबर 2024) के अनुसार यह क्षेत्र मुख्य रूप से बैगा जनजाति का निवास-स्थान है। मरवाही सर्किट में तारा खरा जलप्रपात, परेवा पाथ, चुन्हा दाई, शिव घाट, समुंदलाई कुंड और लखन घाट जैसे स्थल हैं।

GPM जिला प्रशासन की culture-heritage पेज के अनुसार बैगा जनजाति मैकल पर्वत श्रृंखला में मुंगेली, बिलासपुर और GPM जिले में रहती है। गोंड और बैगा का रिश्ता अनूठा है — बैगा परंपरागत रूप से गोंडों के पुजारी (priest) का काम करते हैं।

 

GPM जिला प्रशासन के अनुसार पहली जोड़ी से बैगा और दूसरी जोड़ी से गोंड का जन्म हुआ — इसीलिए बैगा गोंडों के पुरोहित हैं।

2. बैगा — भारत की अनूठी जनजाति

'बैगा' शब्द का अर्थ ही 'जादूगर-वैद्य' (sorcerer-medicine man) है। बैगा को भारत सरकार ने 'विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह' (PVTG) का दर्जा दिया है। Wikipedia (Baiga) के अनुसार 2011 की जनगणना में छत्तीसगढ़ में बैगा की जनसंख्या 89,744 थी।

IDR Online (फरवरी 2026) के GPM-specific अध्ययन के अनुसार जिले के गौरेला ब्लॉक में बैगा 13 ग्राम पंचायतों के 19 गाँवों में रहते हैं। उनकी ज़िंदगी पूरी तरह जंगल पर निर्भर है — जंगल से पारंपरिक खेती, औषधीय जड़ी-बूटियाँ, लकड़ी, फल और सब्ज़ियाँ मिलती हैं।

 

पूर्वज

नंगा बैगा और नंगी बैगिन — मिथकीय पूर्वज। इन्हीं से बैगा समुदाय की उत्पत्ति मानी जाती है।

PVTG दर्जा

भारत के 75 PVTGs में से एक। कमार के बाद छत्तीसगढ़ में आवास अधिकार पाने वाली दूसरी PVTG।

उपजातियाँ

बिझवार, नरोतिया, भारोतिया, नाहर, राय मैना और कठ मैना — Wikipedia (Baiga)।

भाषा

बैगानी (गोंडी-प्रभावित छत्तीसगढ़ी) + हिंदी। Wikipedia (Baiga)।

3. गोत्र व्यवस्था — प्रकृति से जुड़ाव

बैगा समाज में गोत्र (clan) व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण है। IDR Online (2026) के GPM-specific अध्ययन के अनुसार हर गोत्र किसी जानवर, पक्षी या पौधे से जुड़ा होता है और उस गोत्र के सदस्य उसे नहीं खाते। यह प्रकृति-संरक्षण की एक पारंपरिक पद्धति भी है।

 

उपजाति / गोत्र

विशेषता / वर्जना

स्रोत

बिझवार

सबसे प्रमुख उपजाति। गोंडों के पुजारी।

Wikipedia (Baiga) + JETIR 2024

नरोतिया

जंगल और वन-कृषि में विशेषज्ञ।

Wikipedia (Baiga)

भारोतिया

पारंपरिक वन-आधारित जीवनशैली।

Wikipedia (Baiga)

कोरचो गोत्र

बाँस की कोंपलें (bamboo shoots) नहीं खाते।

IDR Online (2026, GPM)

खोरिया गोत्र

कछुआ नहीं खाते।

IDR Online (2026, GPM)

राय मैना / कठ मैना

गाने-बजाने में पारंगत।

Wikipedia (Baiga)

 

यह व्यवस्था न केवल सांस्कृतिक पहचान देती है बल्कि जैव-विविधता के संरक्षण में भी योगदान देती है।

4. गोदना कला — बैगा की पहचान

बैगा जनजाति की सबसे पहचानी जाने वाली परंपरा है गोदना — शरीर पर गोदे जाने वाले टैटू। PSVMKENDRA Journal (peer-reviewed) और Sahapedia के अनुसार बैगा महिलाओं के लिए गोदना केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान है।

माना जाता है कि गोदना वे एकमात्र आभूषण हैं जो मृत्यु के बाद भी साथ रहते हैं। आधुनिकता के प्रभाव से यह परंपरा कम हो रही है, लेकिन मरवाही और मैकल के सुदूर क्षेत्रों में अभी भी जीवित है।

 

कौन गोदता है?

बदनिन (Badnin) या गोंधनारिन — विशेष महिलाएँ। शुरुआत में मंत्र जपती हैं।

स्याही और औज़ार

रमतिला तेल + साल गोंद का मिश्रण। 7-12 सुइयों के गट्ठर को 'फोसा' कहते हैं।

कहाँ गोदा जाता है?

माथा, गर्दन, छाती, पीठ, भुजाएँ, पैर। हर उम्र और स्थान का अलग डिज़ाइन।

पौराणिक कथा

शिव-पार्वती ने बैगिन को इंद्र से मिलने के लिए सजाने हेतु बदनिन को गोदने का काम दिया।

 

Sahapedia — 'गोदना बैगा संस्कृति में इतनी गहराई से रचा-बसा है कि हर बैगा परिवार इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाता है।' लेकिन आज यह कला लुप्त होने के कगार पर है।

5. बेवार — धरती माँ के प्रति श्रद्धा

Sahapedia और Elwin (2007) के अनुसार बैगा मानते हैं कि धरती माँ का सीना हल से चीरना पाप है। इसीलिए वे परंपरागत रूप से बेवार (Bewar) यानी झूम खेती करते थे। जंगल के एक हिस्से में पेड़ काटकर जलाए जाते थे। बारिश के बाद राख से उपजाऊ मिट्टी में बिना हल के बीज बोए जाते थे।

 

Sahapedia — 'बैगा मानते हैं कि जंगल ईश्वर ने इसलिए बनाया ताकि वो सब कुछ दे सके। और बैगाओं को यह समझने का ज्ञान दिया गया।'

 

बेवार (Bewar)

झूम खेती — जंगल जलाकर राख की खाद से बुआई। बिना हल के। आज काफी हद तक प्रतिबंधित।

मुख्य फसलें

कोदो (Kodo Millet) और कुटकी (Kutki) — बैगा का मुख्य अनाज। Wikipedia (Baiga)।

पेज (Pej)

कच्चे मक्के या उबले चावल के पानी से बना पारंपरिक पेय। Wikipedia (Baiga)।

वन से भोजन

जंगल से फल, सब्ज़ियाँ, मछली। जंगल ही बैगा का बाज़ार है। IDR Online (2026)।

6. बैगा और जंगल — एक अटूट रिश्ता

IDR Online (2026) में GPM के बारे में लिखा गया — 'बैगाओं का मानना है: जंगल हमारे बिना नहीं रह सकता और हम जंगल के बिना नहीं रह सकते।' बैगा जड़ी-बूटियों के विशेषज्ञ होते हैं। उनका पारंपरिक वैद्य 'भूमका' गाँव का डॉक्टर होता है। JETIR (2024) के अनुसार बैगा युवाओं ने तीरंदाज़ी में राष्ट्रीय-राज्य स्तर पर पुरस्कार जीते हैं।

 

जड़ी-बूटी ज्ञान

सैकड़ों औषधीय पौधों की जानकारी। भूमका (vaidya) गाँव का पारंपरिक डॉक्टर।

बाँस शिल्प

बाँस बैगा का प्राथमिक संसाधन। टोकरी, बर्तन, दरवाज़े सब बाँस से।

तीरंदाज़ी

बैगा युवा राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर तीरंदाज़ी में पुरस्कार जीत चुके हैं।

वन उपज

महुआ, तेंदूपत्ता, शहद, हर्रा — बैगा की आय के प्रमुख स्रोत।

7. आवास अधिकार — 7 साल की लड़ाई, ऐतिहासिक जीत

6 अक्टूबर 2023 को GPM जिला प्रशासन ने वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 की धारा 3(1)(e) के तहत गौरेला ब्लॉक के 19 बैगा गाँवों को आवास अधिकार (Habitat Rights) दिए। Down to Earth (मार्च 2024) के अनुसार इससे 6,483 लोगों (2,085 परिवारों) को फायदा हुआ। यह दावा 2017 में किया गया था।

 

यह भारत में PVTGs को मिले आवास अधिकारों का तीसरा उदाहरण है — MP में भारिया (पहला), CG में कमार (दूसरा), CG में बैगा (तीसरा)। 75 PVTGs में से अब तक केवल तीन को ही यह अधिकार मिले हैं।

 

अधिकार का नाम

आवास अधिकार — Habitat Rights, FRA 2006, धारा 3(1)(e)।

तिथि

6 अक्टूबर 2023 — GPM जिला प्रशासन द्वारा विशेष आयोजन में।

लाभार्थी

19 गाँव, 6,483 लोग, 2,085 परिवार — गौरेला ब्लॉक, GPM।

क्या मिला?

परंपरागत भूमि, संस्कृति, जैव-विविधता ज्ञान और वन-उपयोग पर कानूनी मान्यता।

8. गोंड जनजाति — मरवाही की दूसरी प्रमुख जनजाति

गोंड मध्य भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है। Sahapedia के अनुसार बैगा और गोंड की जीवनशैली आपस में गहरे जुड़ी है। गोंड परंपरागत रूप से खेती करते हैं जबकि बैगा बेवार करते थे। मरवाही में गोंड गाँवों में भी मड़ई उत्सव, करमा नृत्य और शैला नृत्य की परंपरा है।

9. मरवाही में इको-टूरिज़्म

GPM ecotourism के तहत मरवाही क्षेत्र में पर्यटन के अवसर बन रहे हैं। The Lost Lander (2024) के अनुसार GPM ecotourism का प्रकृति शिविर एक बैगा परिवार द्वारा संचालित है जहाँ पारंपरिक झोपड़ियाँ एक शांत जलाशय के किनारे बनी हैं।

 

बैगा प्रकृति शिविर

GPM ecotourism द्वारा संचालित। बैगा परिवार प्रबंधन। जलाशय के किनारे पारंपरिक झोपड़ियाँ।

तारा खरा जलप्रपात

मरवाही के निकट। The Lost Lander (2024) के अनुसार सुंदर और अनजाना झरना।

समुंदलाई कुंड

मरवाही क्षेत्र में प्राकृतिक जल-स्थल।

शिव घाट / लखन घाट

मरवाही सर्किट का हिस्सा। धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन।

निष्कर्ष

मरवाही क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति भारत की सबसे पुरानी और जीवंत सांस्कृतिक धाराओं में से एक है। बैगा की गोदना कला, बेवार खेती, जड़ी-बूटी का ज्ञान, गोत्र व्यवस्था और जंगल के प्रति उनकी आस्था — ये सब मिलकर एक ऐसी सभ्यता का निर्माण करते हैं जो आधुनिक दुनिया को बहुत कुछ सिखा सकती है।

2023 में मिले आवास अधिकार एक नई उम्मीद लेकर आए हैं। मरवाही आइए — यहाँ की मिट्टी, जंगल और बैगाओं की मुस्कान आपको एक अलग ही दुनिया से रूबरू कराएगी।

 

FAQs

प्र.  मरवाही क्षेत्र की प्रमुख जनजाति कौन-सी है?

उ.  बैगा और गोंड — दोनों मरवाही क्षेत्र की प्रमुख जनजातियाँ हैं। बैगा PVTG हैं और गोंड एक बड़ी जनजाति है।

 

प्र.  बैगा को PVTG क्यों कहा जाता है?

उ.  बैगा एक अत्यंत प्राचीन, वन-निर्भर और पूर्व-कृषि जनजाति है। भारत सरकार ने इन्हें 'Particularly Vulnerable Tribal Group' का दर्जा दिया है।

 

प्र.  गोदना क्या है?

उ.  गोदना बैगा महिलाओं की टैटू परंपरा है। यह आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान है। मान्यता है कि ये टैटू मृत्यु के बाद भी साथ रहते हैं।

 

प्र.  GPM के बैगाओं को 2023 में क्या अधिकार मिले?

उ.  6 अक्टूबर 2023 को GPM जिला प्रशासन ने 19 बैगा गाँवों (6,483 लोग, 2,085 परिवार) को FRA 2006 की धारा 3(1)(e) के तहत आवास अधिकार दिए।

 

प्र.  बेवार खेती क्या है?

उ.  बेवार झूम खेती (Swidden Agriculture) है जिसमें जंगल का हिस्सा जलाकर राख की खाद से बिना हल के बीज बोए जाते थे। बैगा हल चलाना पाप मानते थे।

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