GPM की आजीविका की असली तस्वीर
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला 10 फरवरी 2020 को बिलासपुर जिले से अलग होकर छत्तीसगढ़ का 28वाँ जिला बना। जिले का क्षेत्रफल 2,307.39 वर्ग किलोमीटर है और इसमें 3 तहसील, 3 विकासखंड और 223 गाँव हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या 3,36,420 है, जिसमें से केवल 9.60% लोग शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। शेष 90%+ जनसंख्या ग्रामीण है।
GPM जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और वन-आधारित है, जिसमें अधिकांश निवासी धान, मोटे अनाज की खेती और वन उपज संग्रह में लगे हैं। जिले की 57.09% अनुसूचित जनजाति जनसंख्या के लिए जंगल, जमीन और सरकारी योजनाएँ ही आजीविका का मुख्य स्रोत हैं।
GPM जिला अपने उच्च गुणवत्ता वाले चावल और जनजातीय सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के कारण न केवल छत्तीसगढ़ राज्य में बल्कि पूरे भारत में अपनी अलग पहचान रखता है।
GPM की अर्थव्यवस्था की संरचना: एक नज़र में
| आजीविका का स्रोत | अनुमानित निर्भरता | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|---|
| कृषि (धान, मोटे अनाज) | सर्वाधिक | सभी ग्रामीण क्षेत्र |
| वन उपज संग्रह (NTFP) | अति महत्वपूर्ण | आदिवासी वनांचल |
| मनरेगा (ग्रामीण रोजगार) | महत्वपूर्ण | सभी 223 गाँव |
| वन विभाग और सरकारी नौकरी | सीमित | नगरीय और अर्ध-नगरीय |
| इको-टूरिज्म और पर्यटन | उभरता क्षेत्र | पेण्ड्रा, मरवाही, अचानकमार |
| लघु व्यापार और छोटे उद्योग | मध्यम | गौरेला, पेण्ड्रा नगर क्षेत्र |
| कौशल आधारित रोजगार (ITI/DPLC) | विकासमान | तीनों तहसील |
1. कृषि: GPM की अर्थव्यवस्था की रीढ़
धान (चावल) की खेती
GPM जिले में धान (चावल) की खेती सबसे प्रमुख कृषि गतिविधि है। जिले की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि-आधारित है जिसमें धान और मोटे अनाज प्रमुख फसलें हैं। यहाँ का वार्षिक औसत वर्षा लगभग 2,650 मिलीमीटर है, जो धान की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। GPM जिला अपने उच्च गुणवत्ता वाले चावल के लिए पूरे देश में जाना जाता है।
यहाँ की पहाड़ी और नम जलवायु में उगाया गया धान सुगंधित और पोषक होता है। जिले के किसान मुख्यतः खरीफ मौसम (जून-नवंबर) में धान की बुवाई करते हैं।
मोटे अनाज और अन्य फसलें
धान के अलावा GPM के किसान कोदो, कुटकी, मक्का, अरहर, उड़द और मूँगफली जैसी फसलें भी उगाते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में झूम (bewar) खेती की परंपरा भी रही है, हालाँकि अब इसमें कमी आई है। कुछ क्षेत्रों में सब्जी उत्पादन भी आजीविका का सहायक साधन बन रहा है।
किसान सम्मान निधि और कृषि योजनाएँ
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): छोटे और सीमांत किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता।
- राज्य की समर्थन मूल्य पर धान खरीदी: छत्तीसगढ़ सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी योजना से GPM के किसानों को सीधा लाभ मिलता है।
- कृषि विभाग की योजनाएँ: बीज, खाद और सिंचाई सुविधाओं पर अनुदान।
2. लघु वनोपज (NTFP) संग्रह: जंगल से आजीविका
छत्तीसगढ़ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में लोग मुख्य रूप से कृषि और गैर-लकड़ी वन उपज (NTFP) पर निर्भर हैं। GPM जिले की आदिवासी जनसंख्या के लिए लघु वनोपज संग्रह आजीविका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है। GPM जिला साल वनों से आच्छादित है और यह नदियों के उद्गम का महत्वपूर्ण केंद्र है।
यहाँ के जंगलों से संग्रहित प्रमुख वनोपज:
| लघु वनोपज | उपयोग |
|---|---|
| तेंदू पत्ता | बीड़ी उद्योग — आदिवासियों की सबसे बड़ी वन आय |
| महुआ फूल और बीज | खाद्य तेल, पारंपरिक पेय और खाना पकाने में |
| चार (चिरौंजी) | खाद्य पदार्थ और औषधि |
| हर्रा (हरड़) | आयुर्वेदिक दवाइयाँ |
| बहेड़ा और आँवला | त्रिफला और औषधि |
| साल बीज (सल्फी) | वनस्पति वसा और मक्खन निर्माण |
| लाख | वार्निश और सजावटी उत्पाद |
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ (CGMFP Federation) के माध्यम से GPM के आदिवासी संग्राहकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर वनोपज बेचने का अधिकार है, जिससे उनकी आय में सुधार हो रहा है।
3. मनरेगा: ग्रामीण रोजगार की गारंटी
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA/मनरेगा) GPM जिले के ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण और कानूनी रूप से गारंटीकृत साधन है।
मनरेगा अधिनियम (2005) ग्रामीण परिवारों के लिए 100 दिनों के मजदूरी सहित रोजगार की गारंटी देता है, अकुशल शारीरिक श्रम को कानूनी अधिकार के रूप में सुनिश्चित करता है और आजीविका सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
वित्त वर्ष 2024-25 में मनरेगा के तहत पूरे देश में 290.60 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए। योजना में 440.7 लाख महिलाओं की भागीदारी रही और वित्त वर्ष 2024-25 तक महिलाओं की भागीदारी 58.15% रही।
GPM जिले में मनरेगा के अंतर्गत प्रमुख कार्य:
- ग्राम सड़क निर्माण एवं मरम्मत
- तालाब और कुएँ की खुदाई
- नाला निर्माण और भू-जल संरक्षण
- व्यक्तिगत लाभार्थी कार्य (PMAY के लिए नींव खुदाई, बागवानी)
- वृक्षारोपण और वन संरक्षण
4. विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)
GPM जिले में एक अत्यंत हालिया और महत्वपूर्ण रोजगार पहल शुरू हुई है। विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के जिला स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के पेण्ड्रा स्थित अरपा सभा कक्ष कलेक्ट्रेट में किया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मिशन का शुभारंभ करते हुए ग्रामीण रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और आजीविका संवर्धन पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने कहा कि इस मिशन के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष दो करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे सभी पंचायतों में समान रूप से विकास कार्य किए जा सकेंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा ने कहा कि यह योजना गांव, गरीब और किसानों के विकास से सीधे जुड़ी है और इसके माध्यम से आजीविका, निर्माण कार्य एवं अन्य विकास योजनाओं को गति मिलेगी।
5. वन विभाग और सरकारी नौकरी
GPM जिले में वन विभाग एक प्रमुख नियोक्ता है। जिले के विशाल वन क्षेत्र (अचानकमार टाइगर रिजर्व सहित) की रखवाली, प्रबंधन और संरक्षण के लिए वन रक्षक, वन परिक्षेत्र अधिकारी, रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड जैसे पदों पर नियमित भर्तियाँ होती हैं।
इसके अलावा जिले में सरकारी रोजगार के अन्य प्रमुख स्रोत:
- जिला प्रशासन और तहसील कार्यालय — पटवारी, ग्राम पंचायत सचिव, कोटवार
- शिक्षा विभाग — शिक्षक, प्राचार्य, अतिथि शिक्षक
- स्वास्थ्य विभाग — डॉक्टर, ANM, नर्स, लैब टेक्नीशियन, मितानिन (1,314 मितानिन सक्रिय)
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) — संविदा पदों पर भर्ती
- जिला पंचायत — ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत में नियमित भर्तियाँ
- पुलिस विभाग — आरक्षक, उप-निरीक्षक
6. इको-टूरिज्म और पर्यटन: उभरता रोजगार क्षेत्र
GPM जिले में इको-टूरिज्म एक तेजी से उभरता हुआ रोजगार क्षेत्र है। जिले की प्राकृतिक संपदा, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों की विशेषता इसे एक अनोखा पर्यटन गंतव्य बनाती है।
प्रमुख पर्यटन स्थल और उनकी रोजगार संभावनाएँ
GPM जिले में इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक अन्वेषण के लिए विभिन्न प्रकार के पर्यटन स्थल हैं। जिले के घने जंगल और नदियाँ आउटडोर गतिविधियों के लिए आदर्श हैं, जबकि प्राचीन मंदिर और स्थल तीर्थयात्रियों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।
अचानकमार टाइगर रिजर्व: अचानकमार टाइगर रिजर्व 914 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है और अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। यहाँ जंगल सफारी, नेचर गाइड, रिसोर्ट संचालन और होमस्टे के जरिए स्थानीय युवाओं और आदिवासियों को रोजगार मिल रहा है।
राजमेरगढ़ हिलटॉप: राजमेरगढ़ छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित पेण्ड्रा के पास एक सुरम्य स्थान है, जो रोमांच प्रेमियों का पसंदीदा ट्रेकिंग गंतव्य है। साल वृक्षों की कतारें और हरी-भरी घास के मैदान इसे एक अद्भुत पर्यटन स्थल बनाते हैं।
अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल: गणगई डैम मरवाही के पास स्थित एक प्रमुख आकर्षण है। जलेश्वरधाम गौरेला से लगभग 25 किलोमीटर दूर अमरकंटक मार्ग पर स्थित एक पवित्र और ऐतिहासिक महत्व का धार्मिक स्थल है।
जिला प्रशासन पर्यटन क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की आजीविका उन्नयन के लिए भी कार्य कर रहा है। GPM जिले की अपनी पर्यटन सूचना केंद्र कलेक्टोरेट कार्यालय में स्थित है और GPM इको-टूरिज्म वेबसाइट (gpmtourism.com) भी संचालित है।
पर्यटन से रोजगार के प्रकार:
- टूरिस्ट गाइड और ट्रेकिंग गाइड
- होमस्टे और स्थानीय भोजनालय संचालन
- परिवहन सेवाएँ (टैक्सी और बस)
- हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री
- वन्यजीव पर्यटन और जीप सफारी
GPM जिले तक पहुँचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा रायपुर में स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट है, जो लगभग 220 किलोमीटर दूर है। रेल मार्ग से पेण्ड्रा तहसील में पेण्ड्रा रोड रेलवे स्टेशन जिले का मुख्य रेलवे केंद्र है।
7. लघु और कुटीर उद्योग: स्वरोजगार का आधार
GPM जिले में शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लघु व्यापार और कुटीर उद्योग भी आजीविका के महत्वपूर्ण साधन हैं:
- बाँस शिल्पकला: GPM के वनाच्छादित क्षेत्र में बाँस प्रचुर मात्रा में मिलता है। आदिवासी कारीगर बाँस से टोकरियाँ, फर्नीचर, हस्तशिल्प और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ बनाते हैं।
- मिट्टी के बर्तन (Pottery): ग्रामीण क्षेत्रों में कुम्हार समुदाय मिट्टी के बर्तन और सजावटी सामान बनाकर आजीविका कमाते हैं।
- बीड़ी निर्माण: तेंदू पत्ते के संग्रह के बाद घरों में बीड़ी निर्माण आजीविका का एक सहायक स्रोत है।
- कपड़े और दर्जी कार्य
- परचून दुकानें और किराना व्यापार
- होटल, रेस्तरां और चाय-नाश्ते की दुकानें
- मोबाइल रिपेयरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेवाएँ
8. कौशल विकास से रोजगार: ITI और लाइवलीहुड कॉलेज
GPM जिले में तीन शासकीय ITI (गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही) के माध्यम से युवाओं को तकनीकी दक्षता दी जा रही है जो सीधे रोजगार से जुड़ रही है। ITI के माध्यम से नियमित प्लेसमेंट कैंप भी लगाए जाते हैं:
- फरवरी 2026: तीनों ITI में शिवकृपा इंटरप्राइजेस, राजनांदगाँव द्वारा 300 पदों पर प्लेसमेंट कैंप।
- अप्रैल 2026: GDX ग्रुप, ग्रेटर नोएडा द्वारा ड्रोन पायलट, सुरक्षा जवान, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित 120 पदों पर भर्ती शिविर।
जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज (DPLC) स्वरोजगार-आधारित प्रशिक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण संस्था है।
9. महिला स्व-सहायता समूह (SHG): आर्थिक सशक्तिकरण की कड़ी
GPM जिले में महिला स्व-सहायता समूह (SHG) ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का एक उभरता हुआ माध्यम है। दीनदयाल अंत्योदय योजना — राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत इन समूहों को निम्नलिखित सुविधाएँ मिलती हैं:
- लघु ऋण (माइक्रोफाइनेंस)
- हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण
- बाजार से जोड़ने की सुविधा
GPM जिले में सखी वन स्टॉप सेंटर भी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में भूमिका निभा रहा है।
GPM जिले की रोजगार संरचना की मुख्य चुनौतियाँ
GPM जिले में रोजगार के अनेक अवसर हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियाँ भी हैं:
1. पलायन (Migration): रोजगार की तलाश में कई युवा बिलासपुर, रायपुर या अन्य शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं। साक्षरता दर मात्र 55.92% होने के कारण कुशल रोजगार के अवसर सीमित हैं।
2. मौसमी रोजगार: कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण रोजगार काफी हद तक मौसमी है, यानी केवल खरीफ और रबी मौसम में काम मिलता है।
3. औद्योगिक अनुपस्थिति: जिले में अभी तक कोई बड़ा उद्योग या MSME क्लस्टर विकसित नहीं हुआ है, जो स्थायी और बड़े पैमाने पर रोजगार दे सके।
4. संपर्क और बाजार: निकटतम हवाई अड्डा रायपुर में 220 किलोमीटर दूर है, जिससे व्यापारिक संपर्क सीमित रहता है।
GPM जिले में रोजगार के भविष्य की संभावनाएँ
इको-टूरिज्म का विस्तार: अचानकमार टाइगर रिजर्व, राजमेरगढ़ और अन्य प्राकृतिक स्थलों के आसपास आतिथ्य और पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर उभर सकते हैं।
जैविक कृषि और FPO: GPM के किसान यदि जैविक (Organic) खेती को अपनाएँ और किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाएँ तो अपनी उपज को सीधे बाजार तक पहुँचाकर बेहतर मूल्य पा सकते हैं।
वन आधारित उद्योग: तेंदू पत्ता, महुआ, चार आदि वनोपजों का प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन (Value Addition) यहीं हो तो आदिवासियों की आय कई गुना बढ़ सकती है।
ड्रोन पायलट और नई तकनीक: अप्रैल 2026 में GPM के ITI में हुए भर्ती कैंप में ड्रोन पायलट के 20 पद भरे गए, जो दर्शाता है कि नई तकनीक भी यहाँ के युवाओं के लिए अवसर बन रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: GPM जिले के लोगों का मुख्य व्यवसाय क्या है?
GPM जिले की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि और वन आधारित है। यहाँ के अधिकांश लोग धान और मोटे अनाज की खेती करते हैं। इसके अलावा तेंदू पत्ता, महुआ, चार जैसे लघु वनोपज (NTFP) का संग्रह और बिक्री आदिवासी परिवारों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। GPM जिला अपने उच्च गुणवत्ता वाले चावल के कारण पूरे देश में जाना जाता है।
प्रश्न 2: GPM जिले में मनरेगा से कितने दिन का रोजगार मिलता है?
मनरेगा अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार मिलता है। इस योजना के अंतर्गत GPM के सभी 223 गाँवों में जॉब कार्ड धारक परिवार काम की माँग करके रोजगार पा सकते हैं। भुगतान सीधे बैंक खाते में होता है।
प्रश्न 3: GPM जिले में पर्यटन से किस प्रकार का रोजगार मिलता है?
GPM जिले में अचानकमार टाइगर रिजर्व, राजमेरगढ़ हिलटॉप, गणगई डैम, जलेश्वरधाम जैसे पर्यटन स्थलों के माध्यम से टूरिस्ट गाइड, होमस्टे संचालक, परिवहन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता और रेस्तरां जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर हैं। जिला प्रशासन पर्यटन क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की आजीविका उन्नयन के लिए भी कार्य कर रहा है।
प्रश्न 4: GPM जिले के युवाओं के लिए ITI से रोजगार कैसे मिलता है?
GPM जिले के तीनों शासकीय ITI (गौरेला, पेण्ड्रा, मरवाही) में नियमित प्लेसमेंट कैंप आयोजित होते हैं। फरवरी 2026 में शिवकृपा इंटरप्राइजेस द्वारा 300 पदों और अप्रैल 2026 में GDX ग्रुप द्वारा ड्रोन पायलट, सुरक्षा जवान सहित 120 पदों पर भर्ती शिविर लगाए गए। 10वीं, 12वीं, ITI पास और स्नातक उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न 5: GPM जिले के किसानों को सरकार से क्या आर्थिक सहायता मिलती है?
GPM जिले के किसानों को PM-KISAN के तहत प्रतिवर्ष ₹6,000, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान की सरकारी खरीदी, PM फसल बीमा योजना, सोलर पंप और सिंचाई अनुदान और छत्तीसगढ़ की लघु वनोपज MSP योजना जैसे लाभ मिलते हैं। विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष दो करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।