गौरेला पेंड्रा मरवाही (GPM) जिला छत्तीसगढ़ का एक आदिवासी बहुल और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध जिला है। यहां की अधिकतर आबादी गांवों में रहती है, इसलिए रोजगार के अवसर भी मुख्य रूप से कृषि, वनोपज संग्रहण, ग्रामीण रोजगार योजनाओं, स्वरोजगार और सरकारी सेवाओं पर आधारित हैं।
इस लेख में हम सरल हिंदी भाषा में जानेंगे कि GPM जिले में लोगों को रोजगार किन-किन क्षेत्रों में मिल रहा है, कौन सी सरकारी योजनाएं चल रही हैं और भविष्य में रोजगार की क्या संभावनाएं हैं।
विषय सूची
- जिले का संक्षिप्त परिचय
- रोजगार से जुड़े प्रमुख आंकड़े
- कृषि और वनोपज आधारित रोजगार
- मनरेगा और विकसित भारत मिशन
- स्वरोजगार और महिला स्वयं सहायता समूह
- कौशल विकास और प्रशिक्षण
- सरकारी नौकरियां और भर्ती
- पर्यटन क्षेत्र में रोजगार
- लघु व्यवसाय और स्थानीय बाजार
- प्रमुख चुनौतियां
- भविष्य की संभावनाएं
- निष्कर्ष
- FAQs
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले का संक्षिप्त परिचय
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला बिलासपुर जिले को विभाजित करके बनाया गया था और यह 10 फरवरी 2020 को छत्तीसगढ़ के 28वें जिले के रूप में अस्तित्व में आया। गौरेला इस जिले का मुख्यालय है। जिला छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है और अधिकतर पहाड़ी तथा वनाच्छादित क्षेत्र है।
रोजगार से जुड़े प्रमुख आंकड़े
जिले की अर्थव्यवस्था और रोजगार की स्थिति को समझने के लिए जनगणना 2011 और जिला प्रशासन के आधिकारिक आंकड़े काफी उपयोगी हैं।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले की आधी से अधिक आबादी किसी न किसी रूप में कामकाजी है, लेकिन अधिकतर रोजगार असंगठित क्षेत्र, कृषि और वनोपज पर निर्भर है। जिले में आदिवासी समुदाय की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण वन आधारित आजीविका का विशेष महत्व है।
कृषि और वनोपज आधारित रोजगार
GPM जिले में सबसे अधिक लोग खेती और उससे जुड़े कामों में लगे हुए हैं। यहां की जलवायु और उपजाऊ मिट्टी धान की खेती के लिए उपयुक्त है। जिले का विष्णुभोग चावल अपनी सुगंध और गुणवत्ता के लिए खास पहचान रखता है।
- विष्णुभोग चावल उत्पादन: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूह जैविक विधि से विष्णुभोग चावल का उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन कर रहे हैं।
- महिला FPO: जिले में गठित महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) चावल की ब्रांडिंग और बिक्री का काम संभाल रही है, जिससे किसानों और महिला समूहों को उपज का उचित मूल्य मिल रहा है।
- तेंदूपत्ता संग्रहण: मरवाही वनमंडल के अंतर्गत पेंड्रारोड जिला लघु वनोपज सहकारी संघ की 9 प्राथमिक समितियों के माध्यम से हजारों परिवार हर साल तेंदूपत्ता संग्रहण से आय अर्जित करते हैं।
- बोनस राशि: वर्ष 2023 के संग्रहण सीजन में लगभग 6,593 मानक बोरा तेंदूपत्ता एकत्र किया गया। 10,160 हितग्राहियों के बैंक खातों में ₹1 करोड़ 39 लाख 36 हजार से अधिक की प्रोत्साहन राशि सीधे स्थानांतरित की गई।
विष्णुभोग चावल की फसल — GPM जिले में कृषि आधारित रोजगार | GPM Bazaar
मनरेगा और विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) GPM जिले में भी सक्रिय रूप से लागू है। इसके तहत प्रत्येक पंजीकृत ग्रामीण परिवार को हर वर्ष निश्चित दिनों का अकुशल मजदूरी कार्य दिया जाता है — जैसे सड़क निर्माण, तालाब और जल संरक्षण कार्य, वृक्षारोपण और मिट्टी संरक्षण।
जुलाई 2026 में जिले में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) का जिला स्तरीय शुभारंभ पेंड्रा स्थित अरपा सभा कक्ष कलेक्ट्रेट में किया गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मिशन का शुभारंभ किया।
इस मिशन के प्रमुख प्रावधान
- प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष ₹2 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
- ग्रामीण परिवारों को अब प्रतिवर्ष 100 से बढ़ाकर 125 दिन तक रोजगार दिया जा सकता है।
- मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर सीधे बैंक खाते में किया जाता है।
मनरेगा के तहत ग्रामीण कार्य — GPM जिले में ग्रामीण रोजगार | GPM Bazaar
स्वरोजगार और महिला स्वयं सहायता समूह (बिहान)
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) जिले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके माध्यम से महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, विपणन कौशल और बैंक ऋण की सुविधा दी जाती है।
एक प्रेरक उदाहरण पेंड्रा विकासखंड के देवरीखुर्द गांव की दानवती आर्मो का है, जिन्होंने महज 90 डिसमिल जमीन पर सब्जी की खेती से शुरुआत की थी। बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें तकनीकी जानकारी और ऋण सुविधा मिली, और आज वे सात एकड़ भूमि में आधुनिक तरीके से खेती कर रही हैं। तुलसी महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में वे गांव की कई अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार उपलब्ध करा रही हैं और लखपति दीदी के रूप में पहचानी जाती हैं।
महिला स्वयं सहायता समूह की बैठक — GPM जिले में महिला स्वरोजगार | GPM Bazaar
कौशल विकास और प्रशिक्षण की सुविधाएं
युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार योग्य बनाने के लिए जिले में निम्न सुविधाएं उपलब्ध हैं:
- मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना: जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर सूचीबद्ध योजनाओं के माध्यम से युवाओं को अलग-अलग व्यवसायिक कौशल में प्रशिक्षण दिया जाता है।
- जिला रोजगार कार्यालय: संयुक्त जिला कार्यालय परिसर, टीकरकला, गौरेला में स्थित — रोजगार पंजीयन और रोजगार मेला/प्लेसमेंट कैंप की जानकारी यहां मिलती है।
- रोजगार मेले: छत्तीसगढ़ शासन का कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग समय-समय पर जिले में रोजगार मेलों का आयोजन करता है।
- ITI प्रशिक्षण: नजदीकी पेंड्रा रोड क्षेत्र में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) की सुविधा से युवा तकनीकी और व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।
सरकारी नौकरियां और भर्ती प्रक्रिया
जिला प्रशासन समय-समय पर विभिन्न विभागों में रिक्त पदों के लिए भर्ती विज्ञप्तियां जारी करता है। इनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संविदा भर्ती
- सखी वन स्टॉप सेंटर
- मिशन वात्सल्य योजना
- स्वस्थ तन स्वस्थ मन योजना के तहत निजी चिकित्सकों की मानदेय आधारित नियुक्ति
इच्छुक उम्मीदवार जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर सूचना (Notices) और भर्ती (Recruitment) अनुभाग में समय-समय पर जानकारी देख सकते हैं।
पर्यटन क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं
जिले में स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व और अचानकमार बायोस्फीयर रिजर्व पर्यटन के लिहाज से बड़ी संभावना रखते हैं। यहां वन विश्राम गृह, साल वैली रिजॉर्ट, सोनभद्र टूरिस्ट रिजॉर्ट जैसी सुविधाएं स्थानीय लोगों के लिए हॉस्पिटैलिटी, गाइड और सहायक सेवाओं में रोजगार के अवसर बनाती हैं।
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल
- सोनकुंड
- ज्वालेश्वर धाम
- राजमहल गढ़ी
- दुर्गा धारा जलप्रपात
- लक्ष्मण धारा
- गंगनई डैम नेचर कैंप
ये स्थल होमस्टे, परिवहन सेवाओं और छोटे व्यवसायों के जरिए स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर बना सकते हैं।
अचानकमार टाइगर रिजर्व — GPM जिले में पर्यटन और रोजगार | GPM Bazaar
लघु व्यवसाय और स्थानीय बाजार
गौरेला, पेंड्रा और मरवाही के कस्बों में छोटे दुकानदार, किराना व्यापारी, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री करने वाले व्यवसायी भी बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन करते हैं। स्थानीय बाजारों में साप्ताहिक हाट, कृषि उपज की खरीद-बिक्री और छोटे उद्योग भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं।
रोजगार से जुड़ी प्रमुख चुनौतियां
- जिले की साक्षरता दर 55.92% है, जो राज्य के औसत से कम है — इससे कुशल श्रमशक्ति की उपलब्धता सीमित रहती है।
- पहाड़ी और वनाच्छादित भौगोलिक बनावट के कारण बाजार तक पहुंच और परिवहन में कठिनाई आती है।
- अधिकतर रोजगार मौसमी और वन उपज पर निर्भर है, जिससे साल भर स्थायी आय सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होता है।
- बड़े औद्योगिक आधार के अभाव में रोजगार के लिए युवाओं का पलायन एक समस्या बना रहता है।
भविष्य की संभावनाएं
विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को मिलने वाली ₹2 करोड़ की वार्षिक राशि, बिहान के माध्यम से महिला उद्यमिता को बढ़ावा, कौशल विकास प्रशिक्षण का विस्तार, कृषि प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना और पर्यटन क्षेत्र के विकास से आने वाले वर्षों में जिले में रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला अपनी प्राकृतिक संपदा, वनोपज और कृषि परंपरा के बल पर रोजगार के विविध अवसर प्रदान करता है। कृषि, वन आधारित आजीविका, मनरेगा, महिला स्वयं सहायता समूह और नई शुरू की गई विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन जैसी योजनाएं जिले में रोजगार के आधार को मजबूत कर रही हैं। साथ ही कौशल विकास और पर्यटन क्षेत्र में निवेश से आने वाले समय में जिले के युवाओं और महिलाओं के लिए और अधिक स्थायी रोजगार के द्वार खुल सकते हैं।
FAQs
प्रश्न 1: GPM जिले में सबसे अधिक लोग किस क्षेत्र में रोजगार पाते हैं?
उत्तर: जिले में अधिकतर लोग कृषि, वनोपज संग्रहण जैसे तेंदूपत्ता संग्रहण और ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाओं से जुड़े कार्यों में रोजगार पाते हैं।
प्रश्न 2: जिला रोजगार कार्यालय कहां स्थित है?
उत्तर: जिला रोजगार कार्यालय संयुक्त जिला कार्यालय परिसर, टीकरकला, गौरेला में स्थित है।
प्रश्न 3: महिलाओं के लिए कौन सी योजना स्वरोजगार में मदद करती है?
उत्तर: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन यानी बिहान योजना महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रशिक्षण, ऋण और बाजार सुविधा देकर स्वरोजगार में मदद करती है।
प्रश्न 4: मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को कितने दिन का रोजगार मिलता है?
उत्तर: पहले 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित था, नए प्रावधानों के तहत अब यह बढ़ाकर 125 दिन तक किया जा सकता है।
प्रश्न 5: तेंदूपत्ता संग्रहण से जिले में कितने परिवारों को लाभ मिलता है?
उत्तर: वर्ष 2023 के संग्रहण सीजन में जिले में लगभग 10,160 हितग्राही परिवारों को तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़ी बोनस राशि का सीधा लाभ मिला।