जनसंख्या के आंकड़े किसी भी क्षेत्र की योजना बनाने और विकास करने के लिए आधार होते हैं। GPM (Gaurella-Pendra-Marwahi) जिला छत्तीसगढ़ का एक विशिष्ट जनजातीय बहुल क्षेत्र है जिसकी जनसांख्यिकीय विशेषताएं इसे अलग पहचान देती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि GPM जिले की जनसंख्या कितनी है, इसकी संरचना कैसी है और इसका प्रभाव क्या है।
GPM जिले की कुल जनसंख्या

GPM जिले की जनसंख्या को समझना इसके विकास और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।
नवीनतम उपलब्ध आंकड़े कौन से हैं?
2011 की जनगणना के अनुसार GPM जिले की कुल जनसंख्या 3,36,420 है। यह आंकड़ा उस समय का है जब यह क्षेत्र Bilaspur जिले का हिस्सा था। 10 फरवरी 2020 को GPM अलग जिला बना, लेकिन सबसे हालिया जनगणना 2011 की ही है। 2021 की जनगणना कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दी गई और अब 2025 में होने की संभावना है। वर्तमान में GPM जिले की अनुमानित जनसंख्या लगभग 3.8 से 4 लाख के बीच हो सकती है।
जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति
भारत में जनसंख्या वृद्धि दर लगातार घट रही है, लेकिन ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में यह अभी भी शहरी क्षेत्रों से अधिक है। GPM जिला मुख्य रूप से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्र है, इसलिए यहां जनसंख्या वृद्धि दर राज्य के औसत से थोड़ी अधिक हो सकती है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जीवन प्रत्याशा में सुधार से जनसंख्या में स्वाभाविक वृद्धि हो रही है। साथ ही, परिवार नियोजन कार्यक्रमों के प्रभाव से वृद्धि दर धीरे-धीरे कम हो रही है।
पिछले जनगणना से तुलना
GPM जिला 2020 में बना है, इसलिए इसके लिए पिछली अलग जनगणना उपलब्ध नहीं है। हालांकि, 2001 और 2011 की जनगणना में इस क्षेत्र की तुलना Bilaspur जिले के हिस्से के रूप में की जा सकती है।
2001-2011 के दशक में छत्तीसगढ़ में औसत जनसंख्या वृद्धि दर लगभग 22-23% रही थी। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में यह थोड़ी अधिक थी। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, शिशु मृत्यु दर में कमी और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि ने जनसंख्या वृद्धि में योगदान दिया।
लिंगानुपात (Sex Ratio) और आयु संरचना
लिंगानुपात समाज के स्वास्थ्य और लैंगिक समानता का महत्वपूर्ण संकेतक है।
लिंगानुपात का अर्थ और महत्व
लिंगानुपात का मतलब है प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या। GPM जिले का लिंगानुपात 997 है, जो राष्ट्रीय औसत 940 और छत्तीसगढ़ के औसत 991 से बेहतर है। यह एक स्वस्थ समाज का संकेत है। लिंगानुपात 997 का मतलब है कि प्रति 1000 पुरुषों पर 997 महिलाएं हैं।
यह संतुलित लिंगानुपात जनजातीय समाजों में महिलाओं की बेहतर स्थिति को दर्शाता है। जनजातीय समुदायों में परंपरागत रूप से लड़कियों के प्रति भेदभाव कम है।
पुरुष और महिलाओं की संख्या
2011 की जनगणना के अनुसार GPM जिले में पुरुषों की संख्या लगभग 1,68,728 और महिलाओं की संख्या लगभग 1,67,692 है। यह लगभग बराबर विभाजन है। लिंगानुपात 997 होने का मतलब है कि पुरुष और महिलाओं की संख्या में बहुत कम अंतर है। यह GPM जिले की एक सकारात्मक विशेषता है। कई शहरी और विकसित क्षेत्रों में लिंगानुपात 900 से भी कम है, लेकिन GPM में यह लगभग संतुलित है।
बच्चों और वयस्कों का अनुपात
बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष आयु वर्ग में) भविष्य की जनसांख्यिकी का संकेत देता है। GPM जिले में बाल जनसंख्या कुल जनसंख्या का लगभग 13-15% है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत के करीब है। जनजातीय क्षेत्रों में बाल लिंगानुपात आमतौर पर बेहतर होता है क्योंकि यहां लिंग चयनात्मक गर्भपात की प्रवृत्ति कम है।
कार्यशील आयु वर्ग (15-59 वर्ष) की जनसंख्या लगभग 60-65% है, जो विकास के लिए महत्वपूर्ण मानव संसाधन प्रदान करती है। वृद्ध जनसंख्या (60 वर्ष से अधिक) लगभग 8-10% है।

ग्रामीण बनाम शहरी जनसंख्या
GPM जिला मुख्य रूप से एक ग्रामीण जिला है।
ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या
GPM जिले की कुल जनसंख्या का 90.40% हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है। यह लगभग 3,04,135 लोग हैं। यह जिले की प्रमुख विशेषता है। 223 गांवों में फैली यह जनसंख्या मुख्य रूप से कृषि, वन उपज संग्रहण और पशुपालन पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों का प्रभुत्व है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्थानीय शासन की मजबूत परंपरा है। ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार प्रशासन की प्राथमिकता है।
शहरी क्षेत्र की जनसंख्या
GPM जिले में केवल 9.60% जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है, जो लगभग 32,285 लोग हैं। यह शहरी जनसंख्या मुख्य रूप से Gaurella और Pendra नगर पंचायतों में केंद्रित है। ये दोनों शहर जिले के मुख्य व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र हैं। शहरी क्षेत्रों में व्यापार, सेवा क्षेत्र और सरकारी नौकरियां मुख्य आजीविका के स्रोत हैं। जिले की नगरीय आबादी अपेक्षाकृत कम होने से यह एक ग्रामीण चरित्र वाला जिला है।
Gaurella, Pendra और Marwahi में आबादी का विभाजन
GPM जिले के तीन तहसीलों में जनसंख्या का विभाजन लगभग इस प्रकार है: Gaurella तहसील में लगभग 1,34,135 लोग रहते हैं। इसमें Gaurella शहर की आबादी भी शामिल है जो लगभग 18,165 है। Pendra तहसील की जनसंख्या लगभग 85,481 है, जिसमें Pendra शहर की आबादी लगभग 14,120 है। Marwahi तहसील सबसे बड़ी है जनसंख्या के मामले में, जहां लगभग 1,16,804 लोग रहते हैं। Marwahi पूरी तरह से ग्रामीण है और यहां कोई शहरी क्षेत्र नहीं है। यह सबसे अधिक जनजातीय जनसंख्या वाला क्षेत्र भी है।
साक्षरता दर (Literacy Rate)
साक्षरता शिक्षा और विकास का महत्वपूर्ण संकेतक है।
कुल साक्षरता दर
GPM जिले की कुल साक्षरता दर 55.92% है, जो राष्ट्रीय औसत 74.04% और छत्तीसगढ़ के औसत 71.04% से काफी कम है। यह चिंता का विषय है और शिक्षा क्षेत्र में बहुत काम की जरूरत दर्शाता है। कम साक्षरता दर के कई कारण हैं। यह क्षेत्र दुर्गम पहाड़ी इलाका है जहां स्कूलों तक पहुंच मुश्किल है।
जनजातीय समुदायों में पारंपरिक रूप से औपचारिक शिक्षा पर कम जोर रहा है। आर्थिक कारणों से बच्चे खेती और अन्य कामों में लग जाते हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में सरकारी प्रयासों से साक्षरता में सुधार हो रहा है।
पुरुष और महिला साक्षरता दर
GPM जिले में पुरुष साक्षरता दर लगभग 66-68% है, जबकि महिला साक्षरता दर लगभग 42-44% है। यह लगभग 24 प्रतिशत अंकों का लैंगिक अंतर है, जो चिंताजनक है। महिला साक्षरता राष्ट्रीय औसत 65.46% से बहुत कम है। जनजातीय समाजों में हालांकि लड़कियों के प्रति भेदभाव कम है, लेकिन शिक्षा सुविधाओं की कमी और सामाजिक-आर्थिक कारणों से लड़कियों की शिक्षा प्रभावित होती है। बाल विवाह और घरेलू जिम्मेदारियां भी महिला शिक्षा में बाधक हैं। सरकार विशेष रूप से बालिका शिक्षा पर ध्यान दे रही है।
साक्षरता में सुधार के कारण
हाल के वर्षों में साक्षरता में सुधार के कई कारण हैं। सरकारी स्कूलों का विस्तार, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, हुआ है। आश्रम शालाएं और जनजातीय छात्रावास जनजातीय बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान कर रहे हैं। मध्याह्न भोजन योजना से स्कूल में उपस्थिति बढ़ी है।
मुफ्त किताबें, वर्दी और छात्रवृत्तियां आर्थिक बोझ कम कर रही हैं। जनजातीय विकास विभाग की विशेष योजनाएं प्रभावी साबित हो रही हैं। सर्व शिक्षा अभियान और Right to Education Act के लागू होने से भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जिला बनने के बाद स्थानीय स्तर पर शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
जनजातीय और सामाजिक संरचना
GPM जिले की सबसे विशिष्ट विशेषता इसकी जनजातीय संरचना है।
जनजातीय समुदायों की संख्या
GPM जिले में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 57.09% है, जो लगभग 1,92,073 लोग हैं। यह बहुत बड़ा प्रतिशत है और GPM को एक जनजातीय बहुल जिला बनाता है। मुख्य जनजातियां गोंड, बैगा, पनिका, कोरवा आदि हैं।
Baiga जनजाति विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में आती है। ये समुदाय परंपरागत रूप से वन संसाधनों पर निर्भर हैं और अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं को बनाए हुए हैं। जनजातीय बहुल होने के कारण GPM जिले को विशेष विकास योजनाओं और संवैधानिक सुरक्षा मिलती है।
अन्य सामाजिक वर्गों का अनुपात
अनुसूचित जाति की जनसंख्या GPM जिले में 6.18% है, जो लगभग 20,802 लोग हैं। यह राष्ट्रीय और राज्य के औसत से काफी कम है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य वर्ग की जनसंख्या लगभग 36-37% है। जिले में सामाजिक विविधता है लेकिन जनजातीय समुदायों का स्पष्ट बहुमत है। यह सामाजिक संरचना जिले की नीतियों, विकास योजनाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है। Marwahi विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।
सामाजिक विविधता का प्रभाव
जनजातीय बहुल समाज होने के कारण GPM जिले में कई विशेष विशेषताएं हैं। पारंपरिक शासन व्यवस्था और सामुदायिक निर्णय लेने की प्रथा मजबूत है। वन अधिकार अधिनियम के तहत जनजातीय समुदायों को वन भूमि पर अधिकार मिले हैं। पारंपरिक ज्ञान, कला, संगीत और शिल्प की समृद्ध विरासत है।
हालांकि, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास में चुनौतियां भी हैं। जनजातीय कल्याण योजनाएं, आश्रम शालाएं, और विशेष छात्रवृत्तियां इन समुदायों के उत्थान के लिए चल रही हैं। सामाजिक विविधता सांस्कृतिक समृद्धि लाती है लेकिन विकास में समावेशिता सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है।
रोजगार और कार्यबल वर्गीकरण
रोजगार की स्थिति आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण संकेतक है।
कार्यरत जनसंख्या की संख्या
GPM जिले में कुल कार्यबल में कार्यरत जनसंख्या का अनुपात लगभग 40-45% है। इसका मतलब है कि लगभग 1,35,000 से 1,50,000 लोग किसी न किसी काम में लगे हैं। इनमें मुख्य कार्यकर्ता (main workers) वे हैं जो साल में 6 महीने से अधिक काम करते हैं, और सीमांत कार्यकर्ता (marginal workers) वे हैं जो 6 महीने से कम काम करते हैं।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में सीमांत कार्यकर्ताओं का अनुपात अधिक होता है क्योंकि कृषि मौसमी है। महिलाओं में भी कार्यबल भागीदारी दर पुरुषों से कम है, हालांकि वे वास्तव में घरेलू कामों और वन उपज संग्रहण में बहुत योगदान देती हैं जो अक्सर आधिकारिक आंकड़ों में नहीं आता।
कृषि और कृषि श्रमिकों की हिस्सेदारी
GPM जिले में कुल कार्यबल का लगभग 60-70% कृषि और संबद्ध गतिविधियों में लगा है। इनमें किसान (cultivators) और कृषि मजदूर (agricultural labourers) दोनों शामिल हैं। छोटे और सीमांत किसानों का अनुपात अधिक है। मुख्य फसलें धान, मक्का, कोदो-कुटकी और दलहन हैं।
वन उपज संग्रहण भी एक महत्वपूर्ण आजीविका का स्रोत है। तेंदू पत्ता, महुआ, चिरौंजी, लाख जैसे वन उत्पाद स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं। पशुपालन भी अनुपूरक आय का स्रोत है। गैर-कृषि क्षेत्र में छोटे व्यापार, सरकारी नौकरियां, और निर्माण कार्य शामिल हैं।
बेरोजगारी और रोजगार के अवसर
GPM जिले में खुली बेरोजगारी कम है क्योंकि अधिकांश लोग किसी न किसी काम में लगे हैं, लेकिन छिपी बेरोजगारी (underemployment) और निम्न उत्पादकता एक समस्या है। शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी बढ़ रही है क्योंकि उन्हें उपयुक्त नौकरियां नहीं मिल पातीं। रोजगार के अवसर सीमित हैं क्योंकि औद्योगिक विकास कम है। मनरेगा कुछ हद तक ग्रामीण रोजगार की गारंटी देता है। जिला बनने के बाद सरकारी नौकरियों में वृद्धि हुई है। पर्यटन, वन आधारित उद्योग, कुटीर उद्योग में संभावनाएं हैं। कौशल विकास कार्यक्रमों की जरूरत है ताकि युवा रोजगार योग्य बनें। स्व-रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना आवश्यक है।
भविष्य के लिए जनसंख्या अनुमान
भविष्य की योजना के लिए जनसंख्या अनुमान महत्वपूर्ण हैं।
जनसंख्या वृद्धि के अनुमान
यदि वर्तमान वृद्धि दर जारी रहती है, तो GPM जिले की जनसंख्या 2031 तक लगभग 4 से 4.2 लाख हो सकती है। हालांकि, वृद्धि दर घट रही है। शिक्षा में सुधार, विशेष रूप से महिला शिक्षा, और परिवार नियोजन के प्रसार से वृद्धि दर धीमी होगी।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से शिशु और मातृ मृत्यु दर कम होगी। जीवन प्रत्याशा बढ़ेगी, जिससे वृद्ध जनसंख्या का अनुपात बढ़ेगा। शहरीकरण धीरे-धीरे बढ़ेगा, लेकिन GPM मुख्य रूप से ग्रामीण ही रहेगा। जनजातीय जनसंख्या का अनुपात स्थिर रहने या थोड़ा कम होने की संभावना है।
जनसंख्या के आधार पर विकास योजनाएं
जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर विकास योजनाएं बनाई जाती हैं। बड़ी ग्रामीण और जनजातीय जनसंख्या को देखते हुए ग्रामीण विकास और जनजातीय कल्याण योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। कम साक्षरता दर को देखते हुए शिक्षा क्षेत्र में भारी निवेश की जरूरत है। स्कूलों की संख्या बढ़ाना, शिक्षकों की भर्ती, और गुणवत्ता में सुधार प्राथमिकता है।
कृषि पर निर्भरता को देखते हुए कृषि विकास, सिंचाई सुविधाएं, और कृषि विपणन में सुधार आवश्यक है। युवा जनसंख्या के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, विशेष रूप से मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, जरूरी है। बुनियादी ढांचे - सड़क, बिजली, पानी - का विकास समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
जनसंख्या डेटा का प्रशासन में महत्व
जनसंख्या डेटा प्रशासनिक नियोजन का आधार है। बजट आवंटन जनसंख्या के आधार पर होता है। संसाधनों का वितरण - स्कूल, अस्पताल, राशन की दुकानें - जनसंख्या घनत्व के अनुसार किया जाता है। चुनावी सीमाओं का निर्धारण जनसंख्या पर आधारित है।
सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान जनसंख्या सर्वेक्षण से होती है। जनजातीय जनसंख्या के आधार पर विशेष योजनाएं और आरक्षण मिलता है। आपदा प्रबंधन के लिए जनसंख्या और इसके वितरण की जानकारी जरूरी है। लिंगानुपात और साक्षरता जैसे संकेतक विकास की प्रगति को मापते हैं। सटीक जनसंख्या डेटा प्रभावी शासन के लिए अनिवार्य है।
निष्कर्ष
GPM जिले की जनसंख्या का सारांश
GPM जिले की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 3,36,420 है, जो वर्तमान में लगभग 3.8-4 लाख होने का अनुमान है। यह छत्तीसगढ़ का एक छोटा लेकिन जनसांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण जिला है। जिले की सबसे विशिष्ट विशेषता इसकी जनजातीय संरचना है - 57.09% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है, जो इसे एक जनजातीय बहुल क्षेत्र बनाती है।
लिंगानुपात 997 है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और समाज में लैंगिक संतुलन को दर्शाता है। हालांकि, साक्षरता दर 55.92% है जो चिंता का विषय है और शिक्षा क्षेत्र में बहुत काम की आवश्यकता दर्शाता है। पुरुष साक्षरता 66-68% और महिला साक्षरता 42-44% के बीच है, जो लैंगिक अंतर को उजागर करती है।
जिले की 90.40% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जो इसे एक प्रमुख ग्रामीण जिला बनाती है। केवल 9.60% शहरी आबादी Gaurella और Pendra नगर पंचायतों में केंद्रित है। अधिकांश आबादी कृषि और वन उपज पर निर्भर है।
जनसंख्या के ये आंकड़े प्रशासन और विकास योजना के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक हैं। बड़ी जनजातीय आबादी के कारण विशेष विकास योजनाओं की आवश्यकता है। कम साक्षरता दर शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाती है। ग्रामीण प्रकृति का मतलब है कि कृषि विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, और पंचायती राज सशक्तिकरण पर ध्यान देना होगा।
GPM जिला अपनी अनूठी जनसांख्यिकी के साथ छत्तीसगढ़ के जनजातीय विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। समावेशी विकास सुनिश्चित करना, जहां जनजातीय समुदाय अपनी संस्कृति और पहचान बनाए रखते हुए आधुनिक शिक्षा और आर्थिक अवसरों से लाभान्वित हों, यही इस जिले की सबसे बड़ी चुनौती और अवसर है।