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पेंड्रा और आसपास के मंदिर व पवित्र स्थल

पेंड्रा और आसपास के मंदिर व पवित्र स्थल


पेंड्रा (पेंड्रा रोड), जो GPM जिले की एक प्रमुख तहसील है, उत्तर मध्य भारत में धार्मिक पर्यटन का एक महत्वपूर्ण द्वार है। पेंड्रा रेलवे स्टेशन अमरकंटक का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है — अमरकंटक यहाँ से मात्र 42 किमी दूर है। इसीलिए पेंड्रा और उसके आसपास के क्षेत्र में शिव, शक्ति, जैन और संत परंपराओं से जुड़े अनेक पवित्र स्थल हैं जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

 

एक नज़र में — मुख्य तथ्य

 

42 किमी

पेंड्रा से अमरकंटक की दूरी

12वीं सदी

ज्वालेश्वर धाम की प्राचीनता

51 टन

अमरेश्वर शिवलिंग का भार

9+ स्थल

पेंड्रा के आसपास धार्मिक स्थल

 

1. पेंड्रा के आसपास प्रमुख धार्मिक स्थल — सारांश

 

धार्मिक स्थल

प्रकार

पेंड्रा से दूरी

मुख्य आकर्षण

ज्वालेश्वर महादेव धाम

शिव मंदिर (12वीं सदी)

~25 किमी (अमरकंटक मार्ग)

जोहिला नदी उद्गम, कलचुरी स्थापत्य

अमरेश्वर महादेव मंदिर

शिव मंदिर

~18 किमी (पेंड्रा-अमरकंटक मार्ग)

11 फीट, 51 टन शिवलिंग, 12 ज्योतिर्लिंग प्रतिकृतियाँ

माई की बगिया

नर्मदा पवित्र उद्यान

~42 किमी (अमरकंटक में)

नर्मदा माँ को समर्पित, पौराणिक उद्यान

माई की मड़प

नर्मदा गुफा मंदिर

पेंड्रा तहसील, घने वन में

अनंत ज्वाला, नर्मदा पौराणिक कथा, अमरावती गंगा जलप्रपात

कबीर चबूतरा

संत स्थल

~37 किमी (अमरकंटक के निकट)

कबीर-नानक भेंट स्थल, विशाल बरगद वृक्ष

श्री आदिशक्ति माँ दुर्गा, धनपुर

शक्ति मंदिर

~23 किमी (पेंड्रा-सिओनी मार्ग)

पांडव काल से जुड़ा, प्राचीन मूर्तिकला

बेनीबाई जैन तीर्थ, धनपुर

जैन तीर्थ

~23 किमी + 3 किमी

~25 फीट जैन प्रतिमा, छत्तीसगढ़ की एकमात्र

मानस तीर्थ सोनकुंड

प्राकृतिक तीर्थ

~10 किमी (गौरेला से ~17 किमी)

प्राकृतिक कुंड, वार्षिक मेला

करियम आश्रम

आध्यात्मिक केंद्र

गौरेला क्षेत्र

साधना एवं ध्यान केंद्र

 

2. ज्वालेश्वर महादेव धाम

— 12वीं सदी का कलचुरी मंदिर और जोहिला नदी का उद्गम

पेंड्रा के सबसे प्रमुख और प्राचीन धार्मिक स्थलों में ज्वालेश्वर महादेव धाम का विशेष स्थान है। यह गौरेला से अमरकंटक मार्ग पर लगभग 25 किमी की दूरी पर, मैकल पहाड़ियों के बीच स्थित है। जिला प्रशासन GPM की वेबसाइट और MyAdhyatm.com के अनुसार यह 12वीं सदी का कलचुरी काल का भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है।

यहाँ की मुख्य विशेषता यह है कि जोहिला नदी का उद्गम इसी स्थान से होता है — मान्यता है कि शिवलिंग के नीचे से जोहिला की जलधारा प्रकट होती है। मंदिर परिसर में एक प्राकृतिक सरोवर भी है। यह स्थान नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर पड़ता है।

 

श्रावण मास में हजारों कांवरिये अमरकंटक से नर्मदा जल लेकर पैदल चलते हुए ज्वालेश्वर महादेव को जलाभिषेक करने आते हैं। महाशिवरात्रि पर यहाँ भव्य मेला लगता है। Trawell.in के अनुसार यह मंदिर अमरकंटक से लगभग 10 किमी पहले पड़ता है।

 

स्थापत्य काल

12वीं सदी, कलचुरी शासन काल। स्थानीय और राज्य दोनों स्रोतों से पुष्टि।

जोहिला उद्गम

जोहिला नदी (सोन की सहायक) का उद्गम स्थल। छत्तीसगढ़-MP सीमा पर।

त्योहार

महाशिवरात्रि और श्रावण मास — कांवर यात्रा का प्रमुख गंतव्य।

प्रवेश / समय

निःशुल्क। प्रातः 6 बजे से सायं 6 बजे। निजी वाहन अनिवार्य।

3. अमरेश्वर महादेव मंदिर

— 51 टन शिवलिंग और 12 ज्योतिर्लिंग

पेंड्रा रोड से अमरकंटक मार्ग पर लगभग 42-45 किमी की दूरी पर स्थित अमरेश्वर महादेव मंदिर अपने विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। Trawell.in के अनुसार यह मंदिर अमरकंटक बस स्टैंड से 8 किमी की दूरी पर ज्वालेश्वर मंदिर के ठीक सामने स्थित है।

मंदिर का निर्माण 2009 में प्रारंभ हुआ। गर्भगृह में 11 फीट ऊँचा और 51 टन वजनी शिवलिंग स्थापित है जिसे ओंकारेश्वर (MP) से लाया गया था और जलहरी कटनी से। श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। परिसर में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियाँ भी हैं।

 

ज्वालेश्वर धाम और अमरेश्वर महादेव मंदिर आमने-सामने स्थित हैं। दोनों को एक ही यात्रा में देखा जा सकता है। पेंड्रा से दिन भर की यात्रा में दोनों मंदिर और अमरकंटक — तीनों एक साथ कवर हो जाते हैं।

 

शिवलिंग

11 फीट ऊँचा, 51 टन। ओंकारेश्वर से लाया गया। जलाभिषेक के लिए सीढ़ियाँ।

12 ज्योतिर्लिंग

सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियाँ एक ही परिसर में।

त्योहार

महाशिवरात्रि पर विशेष भीड़। साल भर दर्शन उपलब्ध।

पहुँच

पेंड्रा रोड से अमरकंटक बस/टैक्सी। ज्वालेश्वर के निकट।

4. माई की मड़प — नर्मदा की पौराणिक गुफा

माई की मड़प पेंड्रा तहसील के घने जंगलों में स्थित एक रहस्यमय और आध्यात्मिक स्थल है। The Lost Lander (अक्टूबर 2024) और GPM Ecotourism के अनुसार यह स्थान अमरकंटक जाने वाले यात्रियों के मार्ग पर पड़ता है।

इस स्थान से एक अत्यंत रोचक पौराणिक कथा जुड़ी है: माना जाता है कि माँ नर्मदा यहाँ एक गुफा में छिपी हैं और यहाँ अनन्त काल से एक ज्वाला जल रही है। अमरावती गंगा नदी यहाँ घाटी में उतरकर एक बहुस्तरीय जलप्रपात बनाती है जिसे पार करके मंदिर तक पहुँचना पड़ता है।

 

मानसून काल में अमरावती गंगा की धारा तीव्र हो जाती है और मंदिर तक पहुँचना एक रोमांचक अनुभव बन जाता है। यह स्थल पेंड्रा के पास का एक 'छुपा हुआ रत्न' है जिसे अभी राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उचित स्थान नहीं मिला है।

5. कबीर चबूतरा — संत कबीर और गुरु नानक की ऐतिहासिक भेंट

कबीर चबूतरा पेंड्रा के निकट अमरकंटक मार्ग पर स्थित है। Wikipedia (Amarkantak) और MP Tourism दोनों के अनुसार यह स्थान अमरकंटक से लगभग 5 किमी की दूरी पर बिलासपुर मार्ग पर है। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ 15वीं सदी के महान संत कबीर ने साधना की थी और जहाँ सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी से उनकी ऐतिहासिक भेंट हुई थी।

इस स्थान पर एक विशाल बरगद वृक्ष है जिसके नीचे संत कबीर ने ध्यान किया था। एक छोटी जल-धारा और कबीर का आश्रम भी यहाँ देखा जा सकता है। प्रतिदिन प्रातःकाल सफेद धुएँ की परत जल के ऊपर देखी जाती है जो इस स्थान की आध्यात्मिक विशेषता मानी जाती है।

 

ऐतिहासिक महत्व

कबीर और गुरु नानक की भेंट का स्थान। 15वीं सदी की संत परंपरा से जुड़ा।

प्रतीक

विशाल बरगद वृक्ष, छोटा आश्रम, प्रातः श्वेत धुआँ।

धार्मिक महत्व

कबीरपंथी और सिख दोनों समुदायों के लिए पवित्र। अंतर-धार्मिक सद्भाव का प्रतीक।

स्थान

अमरकंटक से ~5 किमी, बिलासपुर मार्ग पर। पेंड्रा से ~37 किमी।

6. माई की बगिया — नर्मदा माँ का पवित्र उद्यान

माई की बगिया अमरकंटक में नर्मदाकुंड से लगभग 1 किमी की दूरी पर स्थित एक प्राकृतिक उद्यान है। MP Tourism के अनुसार यह वह स्थान माना जाता है जहाँ माँ नर्मदा फूल तोड़ने आती थीं। इस उद्यान में आम, केला और अन्य फलों के वृक्षों के साथ गुलबकावली, गुलाब और अन्य पुष्प पौधे हैं।

उद्यान में एक चरणोदक कुंड और माँ नर्मदा को समर्पित एक छोटा मंदिर है। यह अमरकंटक तीर्थ परिसर का एक अभिन्न हिस्सा है और पेंड्रा से अमरकंटक यात्रा के दौरान अवश्य दर्शनीय है।

7. धनपुर के धार्मिक स्थल — शक्ति और जैन परंपरा का संगम

श्री आदिशक्ति माँ दुर्गा मंदिर

पेंड्रा-सिओनी मार्ग पर लगभग 23 किमी की दूरी पर स्थित यह मंदिर पांडव काल से जुड़ा माना जाता है। यहाँ की प्राचीन मूर्तिकला मुख्य आकर्षण है। जिला प्रशासन GPM के अनुसार यहाँ शैव, शाक्त और जैन तीनों परंपराओं के अवशेष मिले हैं।

बेनीबाई जैन तीर्थ

धनपुर गाँव से लगभग 3 किमी दूर एक विशाल काली बलुई प्राकृतिक शिला पर उकेरी गई जैन तीर्थंकर की प्रतिमा 'बेनीबाई' के नाम से प्रसिद्ध है। जिला प्रशासन GPM के culture-heritage पेज के अनुसार कायोत्सर्ग मुद्रा में बनी यह लगभग 25 फीट ऊँची प्रतिमा छत्तीसगढ़ क्षेत्र में उत्कीर्ण जैन शिल्प का एकमात्र उदाहरण है।

 

धनपुर मंदिर और बेनीबाई को एक ही यात्रा में देखा जा सकता है। पेंड्रा से एक दिन की यात्रा में दोनों को कवर करना आसान है।

8. मानस तीर्थ सोनकुंड और अन्य पवित्र स्थल

गौरेला से लगभग 17 किमी (बिलासपुर मार्ग पर) स्थित मानस तीर्थ सोनकुंड एक प्राकृतिक कुंड है जहाँ वार्षिक मेले का आयोजन होता है। जिला प्रशासन GPM के अनुसार यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं।

 

मानस तीर्थ सोनकुंड

गौरेला से ~17 किमी। प्राकृतिक कुंड। वार्षिक मेला। जिला प्रशासन GPM।

करियम आश्रम

गौरेला क्षेत्र। आध्यात्मिक साधना और ध्यान का केंद्र।

भृगु कमंडलु

अमरकंटक के निकट, पेंड्रा रोड मार्ग पर। प्राचीन तीर्थ। मानसून में घना जंगल।

लक्ष्मण धारा

पेंड्रा के निकट। शांत जलधारा। धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन।

9. यात्रा सुझाव — पेंड्रा से एक दिन का तीर्थ सर्किट

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन पर उतरकर एक दिन में इन सभी स्थलों को देखा जा सकता है। नीचे एक सुझावित यात्रा क्रम दिया गया है:

 

        प्रातः 6 बजे: पेंड्रा से प्रस्थान → माई की मड़प (घने जंगल में, 1-2 घंटे)

        9 बजे: ज्वालेश्वर महादेव धाम (25 किमी, 1-2 घंटे दर्शन)

        11 बजे: अमरेश्वर महादेव मंदिर (ज्वालेश्वर के निकट, 1 घंटा)

        दोपहर: अमरकंटक — माई की बगिया, नर्मदाकुंड (42 किमी, 2-3 घंटे)

        शाम: कबीर चबूतरा (अमरकंटक से 5 किमी, 1 घंटा)

        वापसी पेंड्रा रोड: संध्या 6-7 बजे तक

 

धनपुर और बेनीबाई के लिए अलग से एक दिन रखें (पेंड्रा से 23 किमी, पेंड्रा-सिओनी मार्ग पर)। मानस तीर्थ सोनकुंड गौरेला से 17 किमी (बिलासपुर मार्ग) पर है।

 

निकटतम रेलवे स्टेशन

पेंड्रा रोड (बिलासपुर-कटनी लाइन)। बिलासपुर, रायपुर, जबलपुर से सीधी ट्रेनें।

निकटतम हवाई अड्डा

रायपुर (~220 किमी) या बिलासपुर (~100 किमी)।

सर्वोत्तम समय

अक्टूबर से मार्च। श्रावण में ज्वालेश्वर धाम विशेष।

वाहन

स्थानीय टैक्सी/ऑटो। अमरकंटक के लिए बस भी उपलब्ध।

निष्कर्ष

पेंड्रा और उसके आसपास का क्षेत्र छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर एक अनूठे धार्मिक गलियारे का निर्माण करता है। यहाँ हिंदू शिव-शक्ति परंपरा, जैन तीर्थ और संत-सूफी परंपराएँ एक साथ फलती-फूलती हैं।

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन से शुरू होकर ज्वालेश्वर धाम, अमरेश्वर महादेव, कबीर चबूतरा, माई की बगिया और अमरकंटक तक फैला यह तीर्थ सर्किट हर श्रद्धालु, इतिहास-प्रेमी और प्रकृति-प्रेमी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है।


 

10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्र.  पेंड्रा से अमरकंटक कितनी दूर है?

उ.  पेंड्रा रोड से अमरकंटक लगभग 42 किमी दूर है। MP Tourism और Amarkantak Narmada Yatra दोनों स्रोत यही दूरी बताते हैं।

 

प्र.  ज्वालेश्वर धाम कब जाएं?

उ.  श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में कांवर यात्रा और महाशिवरात्रि पर विशेष अनुभव। अक्टूबर-मार्च में सामान्य दर्शन के लिए सर्वोत्तम।

 

प्र.  कबीर चबूतरा पेंड्रा से कितनी दूर है?

उ.  कबीर चबूतरा अमरकंटक से ~5 किमी (बिलासपुर मार्ग पर) है, यानी पेंड्रा रोड से कुल लगभग 37-40 किमी।

 

प्र.  बेनीबाई जैन तीर्थ कहाँ है?

उ.  धनपुर गाँव से ~3 किमी दूर। धनपुर पेंड्रा से ~23 किमी (पेंड्रा-सिओनी मार्ग पर) है।

 

प्र.  माई की मड़प क्या है?

उ.  यह पेंड्रा तहसील के जंगल में स्थित एक गुफा-मंदिर है जो नर्मदा से जुड़ी पौराणिक कथा का केंद्र है। अमरावती गंगा नदी यहाँ बहुस्तरीय जलप्रपात बनाती है।


निष्कर्ष

पेंड्रा और उसके आसपास का क्षेत्र छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर एक अनूठे धार्मिक गलियारे का निर्माण करता है। यहाँ हिंदू शिव-शक्ति परंपरा, जैन तीर्थ और संत-सूफी परंपराएँ एक साथ फलती-फूलती हैं।

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन से शुरू होकर ज्वालेश्वर धाम, अमरेश्वर महादेव, कबीर चबूतरा, माई की बगिया और अमरकंटक तक फैला यह तीर्थ सर्किट हर श्रद्धालु, इतिहास-प्रेमी और प्रकृति-प्रेमी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है।


 

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