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GPM जिले में वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधन

GPM जिले में वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधन

पर्यावरण  •  प्रकृति  •  जैव-विविधता

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला छत्तीसगढ़ का एक नवगठित और हरा-भरा जिला है, जो अपने घने जंगलों, अनोखी जैव-विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है। 10 फरवरी 2020 को बिलासपुर जिले से अलग होकर छत्तीसगढ़ के 28वें जिले के रूप में अस्तित्व में आया यह जिला, प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरण शोधकर्ताओं के लिए एक अमूल्य धरोहर है।

मुख्य आँकड़े (Key Facts)

2,307 km²
जिले का कुल क्षेत्रफल
914 km²
अचानकमार टाइगर रिज़र्व
3,835 km²
बायोस्फीयर रिज़र्व (कुल)
2,650 mm
औसत वार्षिक वर्षा

1. जिले का परिचय और भौगोलिक स्थिति

GPM जिला छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसा है। यह पूर्व में कोरिया और कोरबा जिलों से, दक्षिण में बिलासपुर और मुंगेली जिलों से, और उत्तर-पश्चिम में मध्य प्रदेश के अनूपुर जिले से घिरा है। जिले का मुख्यालय गौरेला (पेंड्रा रोड) में स्थित है और इसमें तीन तहसीलें, गौरेला, पेंड्रा और मरवाही शामिल हैं।

यह जिला मुख्यतः पहाड़ी है। मैकल पर्वत श्रृंखला इस क्षेत्र की रीढ़ है। जिले में लगभग 2,650 मिमी वार्षिक वर्षा होती है, जो छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों से काफी अधिक है। इसी कारण यहाँ का वन क्षेत्र बेहद समृद्ध और घना है।

2. वन क्षेत्र: जिले की हरी संपदा

GPM जिला छत्तीसगढ़ के सबसे घने वन क्षेत्रों में से एक है। जिले की अर्थव्यवस्था और जनजीवन काफी हद तक वनों पर निर्भर है। यहाँ के वन उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती (Tropical Moist Deciduous) प्रकार के हैं।

2.1 प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ

जिले के वनों में पाई जाने वाली मुख्य वृक्ष प्रजातियाँ:

  • साल (Shorea robusta) — यहाँ का सबसे प्रमुख वृक्ष
  • सागौन (Tectona grandis)
  • महुआ (Madhuca indica)
  • तेंदू (Diospyros melanoxylon)
  • बाँस (Dendrocalamus strictus)
  • बीजा (Pterocarpus marsupium)
  • हल्दू (Adina cordifolia)
  • धावरा (Anogeissus latifolia)
  • सजा (Terminalia tomentosa)

2.2 लघु वन उपज (Non-Timber Forest Products)

GPM जिले में लघु वन उपज (वनोपज) का बहुत महत्व है। स्थानीय आदिवासी समुदाय, विशेषकर बैगा जनजाति की आजीविका इन्हीं पर टिकी है:

  • महुआ के फूल
  • तेंदूपत्ता
  • शहद
  • चार (Char seeds)
  • आँवला, हर्रा, बहेड़ा

जिले की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि और वन-आधारित है। तेंदूपत्ता, महुआ के फूल और शहद जैसे वन उत्पाद जिले के ग्रामीणों की आय का प्रमुख स्रोत हैं।

3. अचानकमार टाइगर रिज़र्व

GPM जिले का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है अचानकमार टाइगर रिज़र्व, जो जिले का प्रमुख पर्यटन और संरक्षण केंद्र भी है।

स्थापना
1975 में वन्यजीव अभयारण्य; 2009 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिज़र्व घोषित।
क्षेत्रफल
557.55 वर्ग किमी मूल क्षेत्र (Core Zone); कुल क्षेत्र लगभग 914 वर्ग किमी।
वन प्रकार
उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन। मनियारी नदी मध्य में प्रवाहित होती है।
कॉरिडोर
कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर के ज़रिए मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व से जुड़ा है।

3.1 प्रमुख वन्यजीव

  • बाघ (Tiger) व तेंदुआ (Leopard)
  • भारतीय बाइसन / गौर (Indian Bison / Gaur)
  • चीतल (Chital) और साँभर (Sambar)
  • जंगली कुत्ता (Wild Dog / Dhole) और हाइना (Hyena)
  • उड़न गिलहरी (Flying Squirrel) और चिंकारा (Chinkara)
  • 150 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ

यह रिज़र्व प्रतिवर्ष नवंबर से जून तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है।

4. अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व

GPM जिला अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व (AABR) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भारत का 14वाँ और छत्तीसगढ़ का पहला बायोस्फीयर रिज़र्व है, जिसे 2005 में स्थापित किया गया और 2012 में UNESCO के विश्व बायोस्फीयर रिज़र्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

3,835 km²
कुल क्षेत्रफल
551.55 km²
कोर ज़ोन (छत्तीसगढ़)
63%
आर्द्र पर्णपाती वन आवरण
1,500+
पादप प्रजातियाँ

इस बायोस्फीयर रिज़र्व में मैकल, विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाएँ मिलती हैं। यहाँ से तीन प्रमुख नदियाँ, नर्मदा, जोहिला और सोन निकलती हैं। रिज़र्व में 105 से अधिक औषधीय पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 25 दुर्लभ मानी जाती हैं।

5. जल संसाधन

GPM जिले में जल संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यहाँ की नदियाँ, झरने और जलाशय न केवल पेयजल बल्कि सिंचाई और पारिस्थितिकी के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

मनियारी नदी
अचानकमार टाइगर रिज़र्व के बीच से गुज़रती है और वनों की जीवनरेखा है।
मलनियाँ बाँध
पेंड्रा क्षेत्र में स्थित, पर्यटन और जलापूर्ति दोनों के लिए महत्वपूर्ण।
गांगनई डैम नेचर कैंप
सल्हेकोटा में स्थित प्रकृति शिविर, इको-टूरिज़्म का केंद्र।
सोनकुंड / मानस तीर्थ
प्राकृतिक कुंड और जैव-विविधता से भरपूर पर्यटन स्थल।

5.1 प्रमुख जलप्रपात

  • दुर्गाधारा झरना
  • झोझा झरना (बस्ती)
  • लक्ष्मण धारा
  • लखन घाट (खर्दी)

6. खनिज संसाधन

GPM जिला खनिज संपदा की दृष्टि से भी समृद्ध है। जिले में पेंड्रा ब्लॉक में टिन (Tin) के भंडार पाए गए हैं, जो इस क्षेत्र की खनिज संभावनाओं को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त यहाँ बॉक्साइट और अन्य लघु खनिजों की उपस्थिति भी रिपोर्ट की गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार के खान विभाग ने GPM जिले में खनिज सर्वेक्षण (Mines Survey Report) कराया है। जिले में खनिज दोहन और इको-टूरिज़्म का संतुलित विकास भविष्य की प्राथमिकता है।

7. जनजातीय समुदाय और वनों से संबंध

GPM जिले की कुल जनसंख्या (2011 जनगणना) 3,36,420 है, जिसमें अनुसूचित जनजाति 57.09% (लगभग 1,92,073) है। बैगा जनजाति यहाँ की सबसे प्रमुख जनजाति है, जो पारंपरिक रूप से वनों पर निर्भर रही है।

बैगा और अन्य आदिवासी समुदाय जड़ी-बूटी संग्रह, महुआ, तेंदूपत्ता, शहद और बाँस शिल्प के ज़रिए अपनी जीविका चलाते हैं। इन समुदायों का पारंपरिक ज्ञान (Traditional Knowledge) वन संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है।

8. पर्यटन और इको-टूरिज़्म

GPM जिला छत्तीसगढ़ में उभरते इको-टूरिज़्म गंतव्यों में से एक है। जिले में दर्शनीय स्थलों की भरमार है:

अचानकमार टाइगर रिज़र्व
जंगल सफारी, वन्यजीव दर्शन, नवंबर से जून तक खुला।
राजमेरगढ़ हिलटॉप
साल वृक्षों की कतारें, घास के मैदान, ट्रेकिंग और कैंपिंग।
जालेश्वर धाम / अमरेश्वर महादेव
प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थल।
गांगनई नेचर कैंप
सल्हेकोटा में प्रकृति शिविर, पर्यावरण पर्यटन का केंद्र।

जिले में पहुँचने का सबसे सुविधाजनक माध्यम पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन है। रायपुर से सड़क मार्ग से जिला लगभग 220 किमी दूर है। नवंबर से मार्च का मौसम (15–25°C) यहाँ आने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।

निष्कर्ष

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला प्रकृति, वन और जैव-विविधता का अनूठा संगम है। अचानकमार टाइगर रिज़र्व, बायोस्फीयर रिज़र्व, घने साल वन, और औषधीय पौधे, ये सब मिलकर इस जिले को छत्तीसगढ़ की पर्यावरण विरासत का एक बेशकीमती हिस्सा बनाते हैं।

यहाँ के वन केवल लकड़ी का स्रोत नहीं, बल्कि लाखों आदिवासियों की आजीविका, कार्बन संतुलन, और जल-स्रोतों का आधार हैं। सतत विकास, इको-टूरिज़्म और वन संरक्षण के संयोजन से GPM जिला भविष्य में एक आदर्श 'ग्रीन डिस्ट्रिक्ट' बन सकता है।

स्रोत एवं संदर्भ

  • Wikipedia – Gaurela-Pendra-Marwahi district (en.wikipedia.org)
  • जिला प्रशासन GPM – gaurela-pendra-marwahi.cg.gov.in
  • Wikipedia – Achanakmar-Amarkantak Biosphere Reserve
  • Tropical Forest Research Institute (TFRI), Jabalpur
  • UNESCO MAB Programme – Achanakmar-Amarkantak
  • Census of India 2011 – Bilaspur District Handbook

FAQs

प्र. GPM जिले में अचानकमार टाइगर रिज़र्व कब बना?

उ. अचानकमार 1975 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित हुआ और 2009 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिज़र्व का दर्जा मिला।

प्र. अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व का क्षेत्रफल कितना है?

उ. इसका कुल क्षेत्रफल 3,835.51 वर्ग किमी है। कोर ज़ोन 551.55 वर्ग किमी छत्तीसगढ़ में और शेष मध्य प्रदेश में है।

प्र. GPM जिले में कौन-कौन सी नदियाँ हैं?

उ. मनियारी नदी प्रमुख है। इस बायोस्फीयर क्षेत्र से नर्मदा, जोहिला और सोन नदियों का उद्गम भी होता है।

प्र. GPM जिले में कौन-सा खनिज पाया जाता है?

उ. पेंड्रा ब्लॉक में टिन (Tin) के भंडार की पुष्टि हुई है। इसके अलावा बॉक्साइट और अन्य लघु खनिज भी पाए जाते हैं।

प्र. GPM जिले की यात्रा का सबसे अच्छा समय कब है?

उ. नवंबर से मार्च के बीच तापमान 15–25°C रहता है और वन्यजीव सफारी के लिए मौसम सबसे अनुकूल होता है।

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GPM जिले में वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधन

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) छत्तीसगढ़ का 28वाँ जिला है, जो घने साल वनों, अचानकमार टाइगर रिज़र्व और UNESCO मान्यता प्राप्त अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व के लिए जाना जाता है। यहाँ 2,307 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले जंगल, 1,500 से अधिक पादप प्रजातियाँ और बैगा जनजाति की समृद्ध वन संस्कृति इसे छत्तीसगढ़ की हरित धरोहर बनाती है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के नजदीकी शहर और जिले

GPM यानी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही छत्तीसगढ़ का 28वाँ जिला है जो 10 फरवरी 2020 को बना। यह जिला बिलासपुर, कोरबा, कोरिया, मुंगेली (छत्तीसगढ़) और अनूपपुर (मध्य प्रदेश) जिलों से घिरा हुआ है। नजदीकी प्रमुख शहरों में पेंड्रा (6 किमी), अनूपपुर (44 किमी) और बिलासपुर (79–110 किमी) शामिल हैं।

GPM जिले का भूगोल: पहाड़, जंगल और नदियां

छत्तीसगढ़ के 28वें जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की भौगोलिक विशेषताएं अद्वितीय हैं। 2,307 वर्ग किमी में फैला यह जिला मैकल पर्वत की गोद में बसा है, जहाँ से अरपा और सोन जैसी प्रमुख नदियाँ निकलती हैं और अचानकमार टाइगर रिजर्व के घने जंगल बाघ, गौर और 150 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर हैं।

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन का महत्व और कनेक्टिविटी

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन (कोड: PND) छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। SECR के बिलासपुर डिवीजन में स्थित इस स्टेशन पर 50 से अधिक ट्रेनें रुकती हैं और यह अचानकमार टाइगर रिजर्व का प्रवेश द्वार भी है।