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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला छत्तीसगढ़ के सबसे आदिवासी-बहुल जिलों में से एक है, जहाँ 57.09% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। यहाँ गोंड और बैगा जनजातियाँ प्रमुख हैं। इसीलिए यहाँ के त्योहार महज उत्सव नहीं हैं — ये प्रकृति, कृषि, पुरखों और देवताओं से जुड़ी जीवंत आस्था के प्रतीक हैं। धान की खेती की शुरुआत से लेकर फसल काटने तक, हर मौसम किसी न किसी पर्व से रंगा होता है। |
मुख्य आँकड़े
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57.09% जनसंख्या — अनुसूचित जनजाति (2011) |
2 प्रमुख जनजातियाँ — गोंड और बैगा |
12+ प्रमुख स्थानीय त्योहार |
74.59% जनसंख्या — छत्तीसगढ़ी भाषी (2011) |
1. जिले की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
GPM जिले में गोंड और बैगा दोनों जनजातियाँ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को त्योहारों, लोक-गीतों, नृत्यों और अनुष्ठानों के माध्यम से जीवित रखती हैं। Grokipedia (2026) के अनुसार जिले की सांस्कृतिक विरासत इन्हीं समुदायों की परंपराओं से गहरे जुड़ी है। बैगा जनजाति परंपरागत रूप से गोंडों के पुजारी (बैगा-देवगुड़ी) का काम करती है और वन, औषधि और कृषि-अनुष्ठानों में विशेष भूमिका निभाती है।
जिले में 74.59% जनसंख्या छत्तीसगढ़ी बोलती है। त्योहारों में छत्तीसगढ़ी लोकगीत, सुआ नृत्य, करमा नृत्य और शैला नृत्य विशेष स्थान रखते हैं। हर त्योहार एक सामाजिक उत्सव भी है जो समुदाय को एकजुट करता है।
2. प्रमुख कृषि और जनजातीय त्योहार
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हरेली पर्व श्रावण अमावस्या (जुलाई-अगस्त) छत्तीसगढ़ का पहला व सबसे महत्वपूर्ण कृषि त्योहार। किसान खेती के औज़ारों और गायों की पूजा करते हैं। 'हरेली' का अर्थ है हरियाली — फसल बुआई की शुरुआत का उत्सव। |
करमा पर्व (कर्म) भादो एकादशी (अगस्त-सितंबर) बैगा, गोंड सहित अन्य जनजातियों का प्रमुख त्योहार। करम देवता की पूजा। कुमारी कन्याएँ 7-9 दिन उपवास रखकर बीज अंकुरित करती हैं। |
नवाखानी भादो माह (अगस्त-सितंबर) नए धान की पहली फसल खाने का उत्सव। बैगा (गाँव का अनुष्ठान प्रमुख) गाँव के देवता देवगुड़िया को नया चावल अर्पित करते हैं। |
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पोला पर्व भादो अमावस्या (अगस्त-सितंबर) बैगा जनजाति का प्रमुख कृषि अनुष्ठान। बैल पूजन, बुआई के अंत का उत्सव। भूमि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व। |
मड़ई (मदाई) उत्सव दिसंबर से मार्च गोंड और बैगा दोनों जनजातियों का मेला। स्थानीय देवताओं की पूजा। लोक-नृत्य, संगीत और नाटक। एक स्थान से दूसरे स्थान पर चलती मड़ई। |
तीजा (तीज) भादो शुक्ल तृतीया (अगस्त-सितंबर) विवाहित महिलाओं का निर्जला व्रत। माता पार्वती की पूजा। लोकगीत, झूला और रंग-बिरंगे परिधान। छत्तीसगढ़ में विशेष महत्व। |
3. त्योहार कैलेंडर — माहवार विवरण
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माह (हिंदी कैलेंडर) |
त्योहार |
समुदाय |
मुख्य विशेषता |
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श्रावण अमावस्या (जुलाई-अगस्त) |
हरेली |
सभी (विशेष: गोंड, बैगा) |
कृषि-औज़ार व गाय पूजा, गेड़ी खेल |
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भादो एकादशी (अगस्त-सितंबर) |
करमा पर्व |
बैगा, गोंड और अन्य |
करम वृक्ष पूजा, कुमारी कन्याओं का उपवास |
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भादो माह (अगस्त-सितंबर) |
नवाखानी |
बैगा, गोंड, किसान |
नई फसल का पहला भोजन, देवगुड़िया पूजन |
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भादो अमावस्या (अगस्त-सितंबर) |
पोला पर्व |
बैगा और किसान |
बैल पूजन, बुआई-समापन उत्सव |
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भादो शुक्ल तृतीया (अगस्त-सितंबर) |
तीजा (तीज) |
महिलाएँ (सर्वसमाज) |
निर्जला व्रत, पार्वती पूजा, लोकगीत |
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आश्विन (सितंबर-अक्टूबर) |
नवरात्रि / दशहरा |
सर्वसमाज |
माँ दुर्गा पूजा, रामलीला |
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कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) |
दिवाली / दीपावली |
सर्वसमाज |
दीप प्रज्वलन, लक्ष्मी पूजा |
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कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) |
छठ पूजा |
हिंदू समाज |
सूर्य उपासना, मनियारी व सोनकुंड पर आयोजन |
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दिसंबर-मार्च |
मड़ई (मदाई) |
गोंड और बैगा |
देवता-पूजन, मेला, लोक-नृत्य, संगीत |
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फाल्गुन (मार्च) |
होली / फागुन |
सर्वसमाज |
रंग, लोकगीत, फाग गायन |
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श्रावण (जुलाई-अगस्त) |
ज्वालेश्वर धाम कांवर |
शिव-भक्त |
अमरकंटक से पैदल कांवर यात्रा |
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माघ पूर्णिमा (जनवरी-फरवरी) |
मानस तीर्थ सोनकुंड मेला |
स्थानीय समाज |
गौरेला से ~17 किमी, वार्षिक मेला |
4. प्रमुख त्योहारों का विस्तृत विवरण
हरेली पर्व — छत्तीसगढ़ का पहला पर्व
हरेली छत्तीसगढ़ का सबसे पहला और महत्वपूर्ण कृषि-उत्सव है जो श्रावण अमावस्या को मनाया जाता है। Sahapedia के peer-reviewed अध्ययन के अनुसार इस दिन किसान अपने खेती के औज़ारों (हल, कुदाल, फावड़ा आदि) की पूजा करते हैं और गायों को विशेष आहार देते हैं। गाँव में भेलवा और नीम की टहनियाँ घरों के दरवाज़ों पर लगाई जाती हैं — इनमें औषधीय गुण होते हैं जो बीमारियों और कीटों से रक्षा करते हैं।
बैगा जनजाति में हरेली विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन बैगा (गाँव का औषधि-वेत्ता) अपने शिष्यों को औषधीय पौधों का ज्ञान देना शुरू करता है। बच्चे 'गेड़ी' (बाँस के डंडों पर चलना) खेलते हैं — मान्यता है कि इससे फसल की वृद्धि होती है।
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हरेली का शाब्दिक अर्थ है 'हरियाली'। यह मानसून आगमन और फसल की बुआई की शुरुआत का उत्सव है। छत्तीसगढ़ सरकार ने हरेली को राज्योत्सव का दर्जा दिया है। |
करमा पर्व — प्रकृति उपासना का उत्सव
करमा (कर्म) पर्व भादो माह की एकादशी को मनाया जाता है, जो सामान्यतः अगस्त-सितंबर में पड़ती है। Wikipedia (Karam Festival) के अनुसार यह बैगा, गोंड और अन्य जनजातीय समुदायों का प्रमुख पर्व है। करम देवता शक्ति, यौवन और जीवन-शक्ति के प्रतीक हैं।
इस पर्व में कुमारी कन्याएँ 7-9 दिन उपवास रखकर नदी की रेत लाकर घर के आँगन में सात बीज (चावल, जौ, मक्का, गेहूँ, चना, उड़द और मसूर) बोती हैं। करम वृक्ष (Nauclea parvifolia) की टहनियाँ लाकर गाँव के आँगन (अखरा/चौपाल) में रोपी जाती हैं। रात भर नृत्य-संगीत और पूजा चलती है।
नवाखानी — नई फसल का पहला निवाला
Sahapedia के अनुसार नवाखानी का शाब्दिक अर्थ है 'नया अनाज खाना'। यह भादो माह के नवें दिन मनाया जाता है। गाँव का बैगा (अनुष्ठान प्रमुख) सबसे पहले नए धान को देवगुड़िया (ग्राम देवता) को अर्पित करता है। इसके बाद पूरा समाज नई फसल ग्रहण करता है। यह पूर्वजों और भूमि के प्रति कृतज्ञता का पर्व है।
पोला पर्व — बैगा का बैल पूजन
Grokipedia (2026) के अनुसार पोला पर्व बैगा जनजाति में एक विशेष कृषि-अनुष्ठान है जो बुआई के मौसम की समाप्ति पर मनाया जाता है। इसमें बैलों की पूजा होती है — उन्हें सजाया जाता है, उनके सींगों पर रंग लगाए जाते हैं और विशेष भोजन दिया जाता है। भूमि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए जुलूस निकाले जाते हैं।
मड़ई उत्सव — जनजातीय चलती-फिरती मड़ई
Wikipedia (Madai Festival) के अनुसार मड़ई दिसंबर से मार्च तक छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में घूम-घूमकर मनाई जाती है। Grokipedia (2026) स्पष्ट करता है कि GPM जिले में गोंड और बैगा दोनों जनजातियाँ मड़ई मनाती हैं। यह मानसून की फसल-कटाई के बाद आयोजित होती है।
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मड़ई की एक खास बात यह है कि यह एक स्थान से दूसरे स्थान पर चलती है — इसे 'चलती-फिरती मड़ई' भी कहते हैं। हर गाँव अपनी तिथि पर मड़ई का आयोजन करता है और पड़ोसी गाँव से देवता को आमंत्रित करता है। |
5. धार्मिक एवं सामाजिक त्योहार
GPM जिले में जनजातीय त्योहारों के साथ-साथ हिंदू और सर्वसामाजिक त्योहार भी पूरे जोश के साथ मनाए जाते हैं:
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छठ पूजा (कार्तिक) मनियारी नदी और सोनकुंड के तट पर विशेष आयोजन। उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य। GPM में लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी है। |
ज्वालेश्वर धाम कांवर (श्रावण) अमरकंटक से पैदल कांवर यात्रा। ज्वालेश्वर महादेव को जलाभिषेक। हजारों कांवरिये पहाड़ी जंगलों से गुज़रकर पहुँचते हैं। |
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नवरात्रि और दशहरा (आश्विन) माँ दुर्गा की नौ-दिवसीय आराधना। धनपुर के माँ आदिशक्ति मंदिर में विशेष आयोजन। रामलीला और शोभायात्रा। |
सोनकुंड मेला (माघ पूर्णिमा) गौरेला से ~17 किमी। वार्षिक मेला। स्नान, पूजा और स्थानीय हस्तशिल्प। जिला प्रशासन GPM द्वारा उल्लिखित। |
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होली / फागुन (फाल्गुन) रंगों का त्योहार। छत्तीसगढ़ में फाग गायन की विशेष परंपरा। GPM के आदिवासी क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। |
महाशिवरात्रि (फाल्गुन) ज्वालेश्वर धाम और अमरेश्वर महादेव मंदिर पर विशाल मेला। रात्रि-जागरण और पूजा। GPM का सबसे बड़ा शैव उत्सव। |
6. लोककला और नृत्य — त्योहारों की आत्मा
GPM जिले के त्योहारों को उनकी लोककला से अलग नहीं किया जा सकता। हर पर्व में ये नृत्य-विधाएँ अनिवार्य रूप से शामिल होती हैं:
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करमा नृत्य करमा पर्व का केंद्रीय नृत्य। युवा स्त्री-पुरुष मंडल बनाकर रात भर नाचते हैं। मांदर और झांझ की थाप पर। |
सुआ नृत्य महिलाओं का पारंपरिक नृत्य। दीपावली के अवसर पर। तोते (सुआ) को प्रतीक मानकर नृत्य। मांगलिक गीतों के साथ। |
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शैला नृत्य पुरुषों का सामूहिक नृत्य। मड़ई और अन्य त्योहारों में। लकड़ी की लाठियों की थाप के साथ। |
फाग लोकगीत होली के अवसर पर। छत्तीसगढ़ी लोकभाषा में। प्रेम, प्रकृति और श्रृंगार के गीत। ढोलक और मंजीरे के साथ। |
निष्कर्ष
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GPM जिले के त्योहार यहाँ की आत्मा हैं। हरेली से शुरू होकर मड़ई तक — हर त्योहार प्रकृति, कृषि और समुदाय के गहरे संबंध की अभिव्यक्ति है। गोंड और बैगा जनजातियों की परंपराएँ इन पर्वों में एक अनूठा रंग भरती हैं जो पूरे भारत में दुर्लभ है। यहाँ के त्योहार देखने आना एक ऐसा अनुभव है जो किताबों में नहीं मिलता — जंगल, नदी, ढोल की थाप और जनजातीय नृत्य मिलकर एक ऐसी सांस्कृतिक दुनिया रचते हैं जो मन को छू जाती है। |
FAQs
प्र. GPM जिले का सबसे पहला और प्रमुख त्योहार कौन-सा है?
उ. हरेली पर्व — श्रावण अमावस्या को मनाया जाता है। यह छत्तीसगढ़ का पहला कृषि-उत्सव है जिसमें खेती के औज़ारों और गायों की पूजा होती है।
प्र. करमा पर्व कब और क्यों मनाया जाता है?
उ. भादो एकादशी (अगस्त-सितंबर) को। करम देवता की पूजा के लिए। कुमारी कन्याएँ 7-9 दिन व्रत रखती हैं और करम वृक्ष की शाखाएँ रोपती हैं।
प्र. मड़ई उत्सव GPM में कब होता है?
उ. दिसंबर से मार्च के बीच। GPM जिले के गोंड और बैगा समुदाय इसे मानसून के बाद विभिन्न गाँवों में आयोजित करते हैं।
प्र. पोला पर्व बैगा जनजाति में क्यों खास है?
उ. पोला बैगा जनजाति का कृषि-अनुष्ठान है जिसमें बैलों की पूजा की जाती है। यह बुआई के मौसम की समाप्ति और भूमि के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है।
प्र. GPM के त्योहारों में कौन-से लोकनृत्य प्रमुख हैं?
उ. करमा नृत्य, सुआ नृत्य, शैला नृत्य और फाग लोकगीत। ये सभी जनजातीय और ग्रामीण परंपरा के अभिन्न अंग हैं।