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GPM जिले में जल स्रोत और नदियां

GPM जिले में जल स्रोत और नदियां

 

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला जल संसाधनों की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का एक अत्यंत समृद्ध जिला है। मैकल पर्वत श्रृंखला और घने वनों की गोद में बसे इस जिले से कई नदियाँ निकलती हैं। इसी बायोस्फीयर रिज़र्व क्षेत्र से भारत की तीन प्रमुख नदियाँ, नर्मदा, जोहिला और सोन, का उद्गम होता है। जिले में बहने वाली मनियारी नदी अचानकमार टाइगर रिज़र्व की जीवनरेखा है।


मुख्य जल-संसाधन आँकड़े

3 प्रमुख

नदियों का उद्गम (नर्मदा, जोहिला, सोन)

~105 किमी

मनियारी नदी की लंबाई

33.61 km²

जल निकाय क्षेत्रफल (AABR)

1927–1930

खुड़िया बाँध निर्माण काल


1. जिले की जल-भौगोलिक स्थिति

GPM जिला छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर मैकल पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यह क्षेत्र प्रायद्वीपीय भारत के प्रमुख जलविभाजकों में से एक है, यहाँ से निकलने वाली नदियाँ एक तरफ अरब सागर और दूसरी तरफ बंगाल की खाड़ी की ओर बहती हैं।

जिला अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व (AABR) का अभिन्न हिस्सा है। TFRI, जबलपुर के अनुसार इस बायोस्फीयर रिज़र्व में जल निकायों का कुल क्षेत्रफल 33.61 वर्ग किमी है। यहाँ अनेक मौसमी नाले (nallas) और स्थायी जलधाराएँ पाई जाती हैं।

Narmada Dairy – GPM जिले में नर्मदा नदी के नाम पर स्थापित डेयरी, गौरेला

2. प्रमुख नदियाँ

नदी का नाम

उद्गम / विशेषता

कहाँ मिलती है

मनियारी नदी

अचानकमार टाइगर रिज़र्व के सिहावल क्षेत्र से उद्गम। जिले की प्रमुख नदी।

शिवनाथ नदी (महानदी बेसिन) — लगभग 105 किमी लंबी

मलनियाँ नदी

GPM जिले के वनाच्छादित पहाड़ियों से। बायोस्फीयर रिज़र्व की बफर ज़ोन में।

मलनियाँ बाँध बनाकर जल संचयन

नर्मदा नदी

अमरकंटक पठार (बायोस्फीयर रिज़र्व क्षेत्र) से उद्गम। पश्चिम की ओर प्रवाह।

अरब सागर (लंबाई ~1,312 किमी)

जोहिला नदी

अमरकंटक से उद्गम। उत्तर की ओर प्रवाह।

सोन नदी की सहायक नदी

सोन नदी

अमरकंटक पठार से उद्गम।

गंगा नदी (पटना के निकट)

आगर / छोटी नर्मदा

मनियारी की सहायक नदियाँ। वनांचल क्षेत्र से निकलती हैं।

मनियारी नदी में मिलती हैं


2.1 मनियारी नदी — जिले की जीवनरेखा

मनियारी नदी GPM जिले की सबसे महत्वपूर्ण नदी है। यह अचानकमार टाइगर रिज़र्व के सिहावल क्षेत्र (कोर ज़ोन) से निकलती है और अचानकमार रिज़र्व के बीचों-बीच से प्रवाहित होती है। ResearchGate पर प्रकाशित peer-reviewed अध्ययन (2023) के अनुसार यह नदी लगभग 105 किमी लंबी है और इसकी 60 किमी से अधिक की यात्रा संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर होती है।

मनियारी नदी मुंगेली और बिलासपुर जिलों से होकर अंततः शिवनाथ नदी में मिलती है, जो महानदी की सहायक नदी है। इस नदी का नाम 'मनियारी' यानी 'मोतियों की माला' इसलिए पड़ा क्योंकि यह घने जंगलों और पहाड़ियों से होकर बहती है और अत्यंत सुंदर लगती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में आगर, कोटरी, घोंघा और छोटी नर्मदा शामिल हैं।

मनियारी नदी अचानकमार टाइगर रिज़र्व की 'जीवनरेखा' कही जाती है। ग्रीष्म काल में जब मौसमी नाले सूख जाते हैं, यही नदी वन्यजीवों के लिए जल का प्रमुख स्रोत बनती है।


2.2 नर्मदा, जोहिला और सोन — तीन महान नदियों का उद्गम

GPM जिले के बायोस्फीयर रिज़र्व क्षेत्र (अमरकंटक पठार) से भारत की तीन प्रमुख नदी प्रणालियाँ, नर्मदा, जोहिला और सोन, का उद्गम होता है। यह तथ्य इस क्षेत्र को भारत के सबसे महत्वपूर्ण जलस्रोत क्षेत्रों में से एक बनाता है।

नर्मदा नदी

अमरकंटक के 'नर्मदा कुंड' से उद्गम। पश्चिम की ओर ~1,312 किमी बहकर अरब सागर में मिलती है। हिंदुओं की पवित्र नदी।

जोहिला नदी

अमरकंटक से उद्गम। उत्तर की ओर बहती है और सोन नदी की सहायक नदी है। छत्तीसगढ़ से होकर गुज़रती है।

सोन नदी

अमरकंटक पठार से उद्गम। उत्तर की ओर बहकर गंगा नदी में मिलती है। मध्य भारत की प्रमुख नदी।

जलविभाजक

AABR क्षेत्र अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के जलग्रहण क्षेत्रों को अलग करता है, एक दुर्लभ भौगोलिक विशेषता।

3. बाँध और जलाशय

GPM जिले और उसके समीपवर्ती क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बाँध और जलाशय हैं जो सिंचाई, पेयजल और वन्यजीव संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं।

खुड़िया बाँध / राजीव गाँधी जलाशय

मनियारी नदी पर, तीन प्राकृतिक पहाड़ियों को जोड़कर 1927–1930 में निर्मित। मुंगेली जिले में स्थित। ब्रिटिश काल की इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण।

मलनियाँ बाँध

मलनियाँ नदी पर निर्मित, AABR के बफर ज़ोन में। गर्मियों में वन्यजीवों के लिए जलस्रोत। TFRI द्वारा दस्तावेज़ीकृत।

गांगनई डैम (सल्हेकोटा)

मरवाही के निकट, प्रकृति शिविर (Nature Camp) का केंद्र। इको-टूरिज़्म के लिए प्रसिद्ध।

मलनियाँ बाँध पाकरिया

पेंड्रा क्षेत्र में स्थानीय जलापूर्ति और पर्यटन के लिए उपयोगी।


खुड़िया बाँध की एक अनोखी विशेषता यह है कि इसे तीन प्राकृतिक पहाड़ियों के बीच मनियारी नदी को रोककर बनाया गया था। 1927 में शुरू होकर 1930 में पूर्ण हुआ यह बाँध ब्रिटिशकालीन सिंचाई इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना है।

Surbhi Hotel – गौरेला में ठहरने की सुविधा, GPM जिले में इको-टूरिज़्म के लिए आदर्श

4. झरने और प्राकृतिक जल-स्थल

GPM जिले में अनेक सुंदर झरने, प्राकृतिक कुंड और जल-स्थल हैं जो पर्यटन और धार्मिक आस्था दोनों के केंद्र हैं।

जलप्रपात / स्थल

स्थान

विशेषता

दुर्गाधारा झरना

धनपुर क्षेत्र, GPM

घने जंगल में बहुस्तरीय जलप्रपात

झोझा झरना

बस्ती क्षेत्र, GPM

प्राकृतिक पर्यटन स्थल

लक्ष्मण धारा

GPM वनांचल

शांत प्रवाह, धार्मिक महत्व

लखन घाट

खर्दी, GPM

नदी घाट, स्थानीय आस्था केंद्र

सोनकुंड / मानस तीर्थ

गौरेला से ~17 किमी

प्राकृतिक कुंड, पर्यटन स्थल

समुंदलाई कुंड

मरवाही क्षेत्र

सुंदर प्राकृतिक जल-स्थल


इनके अलावा मरवाही क्षेत्र में तारा खरा जलप्रपात, शिव घाट और लखन घाट जैसे स्थल भी स्थानीय जनमानस में महत्वपूर्ण हैं। अमरावती गंगा नदी पेंड्रा क्षेत्र में एक बहुस्तरीय जलप्रपात का निर्माण करती है जो माई की मड़प तीर्थ स्थल के पास है।

5. जल संसाधनों का कृषि और जनजीवन पर प्रभाव

GPM जिले की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि और वन-आधारित है। पर्याप्त वर्षा (1,624.3 मिमी) और नदी-नालों के कारण यहाँ धान, मक्का, कोदो-कुटकी की अच्छी खेती होती है। मनियारी नदी और उसकी सहायक नदियाँ मुंगेली और बिलासपुर जिले के किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराती हैं।

बैगा जनजाति सहित अन्य आदिवासी समुदाय पारंपरिक रूप से नदियों और जल-स्रोतों पर निर्भर रहे हैं। छठ पूजा जैसे त्योहारों में मनियारी और अन्य नदियों के किनारे विशेष आयोजन होते हैं।

सिंचाई

खुड़िया/राजीव गाँधी जलाशय से मुंगेली-लोरमी ब्लॉक के किसान सिंचाई करते हैं।

पेयजल

मनियारी नदी से क्षेत्र के कई गाँवों और शहरों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना कार्यान्वित है।

वन्यजीव

खुड़िया और मलनियाँ बाँध गर्मियों में वन्यजीवों के लिए जल का एकमात्र स्रोत बनते हैं।

इको-टूरिज़्म

गांगनई नेचर कैंप, सोनकुंड और झरने इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देते हैं। Surbhi Hotel – Stay & Food Service in Gaurela जैसे स्थानीय आवास विकल्प पर्यटकों के लिए उपलब्ध हैं।

Desi Murgi Farm – GPM Bazaar Parasi, GPM जिले में स्थानीय कृषि और पशुपालन

निष्कर्ष

GPM जिला जल संसाधनों की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के सबसे समृद्ध जिलों में से एक है। अचानकमार की पहाड़ियों से निकलने वाली मनियारी नदी, अमरकंटक से उद्गमित नर्मदा-जोहिला-सोन, और जिले में फैले बाँध-झरने-कुंड मिलकर यहाँ के जनजीवन, कृषि और जैव-विविधता को पोषित करते हैं।

इन जल स्रोतों का संरक्षण न केवल GPM जिले बल्कि मध्य भारत की जल-सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सतत जल प्रबंधन, वन संरक्षण और इको-टूरिज़्म के संयोजन से GPM जिले के जल स्रोतों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।


FAQs

प्र. GPM जिले की मुख्य नदी कौन-सी है?

उ. मनियारी नदी GPM जिले की प्रमुख नदी है जो अचानकमार टाइगर रिज़र्व के सिहावल क्षेत्र से निकलती है। यह लगभग 105 किमी लंबी है और शिवनाथ नदी में मिलती है।

प्र. क्या GPM जिले से नर्मदा नदी निकलती है?

उ. नर्मदा नदी का उद्गम अमरकंटक पठार (अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व) से होता है, जो GPM जिले के बायोस्फीयर क्षेत्र में आता है। नर्मदा, जोहिला और सोन, तीनों नदियाँ इसी क्षेत्र से निकलती हैं।

प्र. खुड़िया बाँध किस नदी पर है और कब बना?

उ. खुड़िया बाँध (राजीव गाँधी जलाशय) मनियारी नदी पर, मुंगेली जिले में, 1927 से 1930 के बीच ब्रिटिश काल में बना।

प्र. GPM में मनियारी नदी का क्या महत्व है?

उ. मनियारी नदी अचानकमार टाइगर रिज़र्व की 'जीवनरेखा' है। यह वन्यजीवों के लिए जल, स्थानीय कृषि के लिए सिंचाई और पेयजल का प्रमुख स्रोत है।

प्र. GPM जिले में कौन-से प्रमुख झरने हैं?

उ. दुर्गाधारा झरना, झोझा झरना (बस्ती), लक्ष्मण धारा और सोनकुंड/मानस तीर्थ प्रमुख हैं। मरवाही क्षेत्र में तारा खरा जलप्रपात भी उल्लेखनीय है।

 

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