गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला केवल प्राकृतिक सौंदर्य का ही नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का भी अनूठा केंद्र है। यहाँ हिंदू, जैन और सिख-संत परंपराओं से जुड़े ऐसे स्थल हैं जो सदियों से श्रद्धालुओं और इतिहास-प्रेमियों को अपनी ओर खींचते आए हैं। मैकल पर्वत श्रृंखला की गोद में बसे इन स्थलों तक पहुँचना ही एक दिव्य अनुभव है।
एक नज़र में — प्रमुख आँकड़े
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8+ |
12वीं सदी |
~25 फीट |
51 टन |
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प्रमुख धार्मिक / आध्यात्मिक स्थल |
ज्वालेश्वर धाम की प्राचीनता (कलचुरी काल) |
बेनीबाई जैन प्रतिमा की ऊँचाई |
अमरेश्वर महादेव शिवलिंग का भार |
GPM जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों का सारांश
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धार्मिक स्थल |
तहसील |
दूरी / स्थान |
विशेषता |
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ज्वालेश्वर धाम |
गौरेला |
गौरेला से ~25 किमी (अमरकंटक मार्ग) |
12वीं सदी, कलचुरी काल, जोहिला नदी का उद्गम स्थल |
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अमरेश्वर महादेव मंदिर |
गौरेला |
अमरकंटक से ~8-10 किमी (पेंड्रा रोड मार्ग) |
11 फीट ऊँचा 51 टन शिवलिंग, 12 ज्योतिर्लिंग प्रतिकृतियाँ |
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श्री आदिशक्ति माँ दुर्गा मंदिर, धनपुर |
पेंड्रा |
पेंड्रा-सिओनी मार्ग पर ~23 किमी |
पांडव काल से जुड़ा, प्राचीन मूर्तिकला |
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बेनीबाई (जैन तीर्थ), धनपुर |
पेंड्रा |
धनपुर गाँव से ~3 किमी |
~25 फीट ऊँची जैन तीर्थंकर प्रतिमा, छत्तीसगढ़ में एकमात्र |
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कबीर चबूतरा |
पेंड्रा |
पेंड्रा क्षेत्र, अमरकंटक के निकट |
संत कबीर और गुरु नानक देव जी की भेंट का ऐतिहासिक स्थल |
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मानस तीर्थ सोनकुंड |
गौरेला |
गौरेला से ~17 किमी (बिलासपुर मार्ग) |
प्राकृतिक कुंड, वार्षिक मेले का आयोजन |
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माई की बगिया |
पेंड्रा |
पेंड्रा तहसील, घने जंगल में |
नर्मदा से जुड़ी पौराणिक कथा, अनन्त ज्वाला |
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करियम आश्रम |
गौरेला |
गौरेला क्षेत्र |
आध्यात्मिक केंद्र, साधना स्थल |

ज्वालेश्वर धाम — 12वीं सदी का शिव मंदिर
ज्वालेश्वर धाम GPM जिले का सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह गौरेला से अमरकंटक मार्ग पर लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित है। जिला प्रशासन GPM की वेबसाइट के अनुसार यह 12वीं सदी का कलचुरी काल का भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है।
यह मंदिर एक विशेष भौगोलिक और धार्मिक महत्व रखता है क्योंकि यहीं से जोहिला नदी का उद्गम होता है। स्थानीय मान्यता है कि स्वयंभू शिवलिंग यहाँ प्रकट हुआ था। श्रावण मास में हजारों की संख्या में कांवरिये अमरकंटक से नर्मदा जल लेकर पैदल चलते हुए ज्वालेश्वर महादेव को जलाभिषेक करने आते हैं। महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष मेला लगता है।
ज्वालेश्वर धाम छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। मंदिर परिसर में एक प्राकृतिक सरोवर भी है। मंदिर के पुजारी और GPM जिला पुलिस दोनों इसे छत्तीसगढ़ का हिस्सा मानते हैं।
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स्थापत्य काल 12वीं सदी, कलचुरी शासन काल — GPM जिला प्रशासन वेबसाइट। |
धार्मिक महत्व जोहिला नदी का उद्गम स्थल। नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर स्थित। |
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प्रमुख त्योहार महाशिवरात्रि और श्रावण मास में विशेष मेले। कांवर यात्रा प्रसिद्ध। |
प्रवेश शुल्क निःशुल्क। समय: प्रातः 6 बजे से सायं 6 बजे तक। |

अमरेश्वर महादेव मंदिर — विशाल शिवलिंग का धाम
अमरेश्वर महादेव मंदिर GPM जिले का एक अन्य महत्वपूर्ण शिव मंदिर है जो अमरकंटक से लगभग 8-10 किमी (पेंड्रा रोड मार्ग पर) स्थित है। Trawell.in के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 2009 में प्रारंभ हुआ। इसका गर्भगृह निर्मित हो चुका है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थापित 11 फीट ऊँचा और 51 टन भार का शिवलिंग है जिसे ओंकारेश्वर से लाया गया था और जलहरी कटनी से। श्रद्धालुओं को शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर परिसर में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियाँ भी स्थापित हैं।
ज्वालेश्वर धाम और अमरेश्वर महादेव मंदिर एक-दूसरे के निकट (लगभग आमने-सामने) स्थित हैं। एक ही यात्रा में दोनों के दर्शन किए जा सकते हैं।
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विशेष आकर्षण 11 फीट ऊँचा 51 टन शिवलिंग। 12 ज्योतिर्लिंग प्रतिकृतियाँ। शिवलिंग पर सीढ़ियों से जलाभिषेक। |
निर्माण 2009 में प्रारंभ। शिवलिंग ओंकारेश्वर से, जलहरी कटनी से लाई गई। |
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त्योहार महाशिवरात्रि पर विशेष भीड़। पेंड्रा रोड से पहुँचा जा सकता है। |
प्रवेश निःशुल्क। निजी वाहन अनिवार्य — सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं। |

माँ आदिशक्ति दुर्गा मंदिर, धनपुर — शक्तिपीठ
धनपुर स्थित माँ आदिशक्ति दुर्गा मंदिर पेंड्रा-सिओनी मार्ग पर लगभग 23 किमी की दूरी पर स्थित है। जिला प्रशासन GPM के अनुसार इस स्थान पर पांडवों के अज्ञातवास के दौरान ठहरने की मान्यता है।

यहाँ की प्राचीन मूर्तिकला मुख्य आकर्षण है। धनपुर परिसर में जैन धर्म, शैव धर्म और शक्ति उपासना से जुड़े अवशेष मिले हैं। यहाँ ऋषभनाथ सरोवर के निकट जैन तीर्थंकर की मूर्ति भी स्थापित है। माँ दुर्गा की मूर्ति के साथ अनेक प्राचीन शिल्प यहाँ संरक्षित हैं।

बेनीबाई — छत्तीसगढ़ की एकमात्र जैन शैल-प्रतिमा
धनपुर गाँव से लगभग 3 किमी दूर एक विशाल काली बलुई प्राकृतिक शिला पर उकेरी गई जैन तीर्थंकर की प्रतिमा 'बेनीबाई' के नाम से जानी जाती है। जिला प्रशासन GPM की आधिकारिक संस्कृति पेज के अनुसार यह कायोत्सर्ग मुद्रा में बनी लगभग 25 फीट ऊँची प्रतिमा छत्तीसगढ़ क्षेत्र में उत्कीर्ण जैन शिल्प का एकमात्र उदाहरण है।

बेनीबाई न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन यहाँ एक संग्रहालय विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है।
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प्रतिमा की ऊँचाई लगभग 25 फीट (7.6 मीटर) — जिला प्रशासन GPM के अनुसार। |
विशिष्टता छत्तीसगढ़ क्षेत्र में उत्कीर्ण जैन शिल्प का एकमात्र उदाहरण। |
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मुद्रा कायोत्सर्ग मुद्रा — जैन ध्यान की एक विशेष मुद्रा। |
स्थान धनपुर गाँव से ~3 किमी। धनपुर मंदिर के साथ एक ही दिन में दर्शन संभव। |
कबीर चबूतरा — संत परंपरा का ऐतिहासिक स्थल
पेंड्रा क्षेत्र में अमरकंटक के निकट स्थित कबीर चबूतरा एक ऐसा स्थान है जो धार्मिक पर्यटन में विशेष महत्व रखता है। जिला प्रशासन GPM के culture-heritage पेज के अनुसार यह वह स्थान है जहाँ महान संत कबीर और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की ऐतिहासिक भेंट हुई थी।
इस स्थान का उल्लेख धार्मिक यात्राओं में होता है और यह हिंदू व सिख दोनों समुदायों के लिए आस्था का केंद्र है। यहाँ आकर एक अलग आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।
अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल
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मानस तीर्थ सोनकुंड गौरेला से ~17 किमी (बिलासपुर मार्ग)। प्राकृतिक कुंड, वार्षिक मेला। जिला प्रशासन GPM की वेबसाइट पर उल्लिखित। |
माई की बगिया पेंड्रा तहसील, घने जंगल में। नर्मदा से जुड़ी पौराणिक कथा। अनंत ज्वाला, बहुस्तरीय जलप्रपात। |
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करियम आश्रम गौरेला क्षेत्र। आध्यात्मिक साधना और ध्यान का केंद्र। जिला प्रशासन GPM के places-of-interest पेज पर। |
बाबा हज़रत सैयद इंसान अली दरगाह, लरकेनी GPM जिले में सूफी परंपरा का स्थल। सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक। |
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माई की मड़प पेंड्रा तहसील, माई की बगिया के निकट। नर्मदा से जुड़ी लोक-कथा। अमरकंटक दर्शन मार्ग पर। |
शिव घाट, मनौरा (मरवाही) मरवाही क्षेत्र। शिव उपासना का स्थानीय तीर्थ। पिकनिक स्थल भी। |
यात्रा सुझाव और पहुँच
GPM जिले के धार्मिक स्थलों तक पहुँचने के लिए पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है (बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग)। रायपुर से सड़क मार्ग से जिला लगभग 220 किमी दूर है।
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सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च। श्रावण में ज्वालेश्वर धाम की विशेष यात्रा। महाशिवरात्रि पर भीड़। |
पहुँचने का साधन पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन → स्थानीय टैक्सी/ऑटो। बिलासपुर या रायपुर से बस। |
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ज्वालेश्वर + अमरेश्वर दोनों मंदिर आस-पास हैं — एक ही दिन में दर्शन करें। |
धनपुर + बेनीबाई धनपुर मंदिर और बेनीबाई एक ही यात्रा में। पेंड्रा से ~23 किमी। |
GPM जिले में टैक्सी और यात्रा सेवाएँ
धार्मिक स्थलों तक पहुँचने के लिए GPM जिले में कई विश्वसनीय टैक्सी और यात्रा सेवाएँ उपलब्ध हैं। आप Wahid Travel – Taxi Service in Gourela, Trevals – Tour & Travel Service in Pendra Road, Hukumchand Yadav – Taxi Service in Pendraroad, Yadav Tour & Travels – Taxi in Pendra Road, या Shree Vijay Travels – Taxi on Rent in Pendra Road की सेवाएँ ले सकते हैं।

निष्कर्ष
GPM जिला धार्मिक विविधता का एक अद्भुत संगम है। यहाँ हिंदू, जैन और सिख-संत परंपराओं के पवित्र स्थल एक ही भूमि पर मिलते हैं। 12वीं सदी का ज्वालेश्वर धाम, विशाल अमरेश्वर शिवलिंग, छत्तीसगढ़ की एकमात्र जैन शैल-प्रतिमा बेनीबाई, और कबीर-नानक की भेंट का कबीर चबूतरा — ये सब मिलकर GPM को एक अनूठा तीर्थ क्षेत्र बनाते हैं।
यहाँ के धार्मिक स्थलों तक पहुँचना, उनकी प्राचीनता को महसूस करना और मैकल पर्वत श्रृंखला की हरियाली के बीच ध्यान करना — यह अनुभव हर आगंतुक को जीवनभर याद रहता है।
FAQs
प्र. GPM जिले का सबसे प्राचीन धार्मिक स्थल कौन-सा है?
उ. ज्वालेश्वर धाम 12वीं सदी (कलचुरी काल) का है और GPM जिले का सबसे प्राचीन दस्तावेज़ीकृत धार्मिक स्थल है।
प्र. बेनीबाई जैन प्रतिमा क्यों विशेष है?
उ. यह छत्तीसगढ़ क्षेत्र में उत्कीर्ण जैन शिल्प का एकमात्र उदाहरण है। लगभग 25 फीट ऊँची यह प्रतिमा कायोत्सर्ग मुद्रा में प्राकृतिक शिला पर बनी है।
प्र. अमरेश्वर महादेव में क्या खास है?
उ. यहाँ 11 फीट ऊँचा और 51 टन वजनी शिवलिंग है जिसे ओंकारेश्वर से लाया गया था। 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियाँ भी हैं। जलाभिषेक के लिए सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
प्र. कबीर चबूतरा का क्या महत्व है?
उ. यह वह स्थान है जहाँ संत कबीर और गुरु नानक देव जी की ऐतिहासिक भेंट हुई थी। यह हिंदू और सिख दोनों परंपराओं के लिए पवित्र है।
प्र. GPM के धार्मिक स्थल देखने का सबसे अच्छा समय कब है?
उ. अक्टूबर से मार्च सामान्य पर्यटन के लिए सर्वोत्तम। श्रावण मास में ज्वालेश्वर धाम और महाशिवरात्रि पर विशेष अनुभव मिलता है।