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GPM जिले का भूगोल: पहाड़, जंगल और नदियां

GPM जिले का भूगोल: पहाड़, जंगल और नदियां

छत्तीसगढ़ के उत्तर में बसा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला मैकल पर्वत श्रृंखला, घने साल के जंगलों और कई प्रमुख नदियों के उद्गम की धरती है। यह जिला न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, बल्कि पारिस्थितिकी की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अचानकमार टाइगर रिजर्व और अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व जैसे राष्ट्रीय महत्त्व के संरक्षित क्षेत्र इस जिले को एक विशेष पहचान देते हैं।

जिले की मुख्य सांख्यिकी

कुल क्षेत्रफल

2,307 km²

स्थापना

10 फर. 2020

औसत ऊंचाई

~602 मीटर

जनसंख्या (2011)

3,36,420

विभाग

बिलासपुर

मुख्यालय

गौरेला

1. जिले की भौगोलिक स्थिति

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित है। इसे 10 फरवरी 2020 को बिलासपुर जिले से अलग करके छत्तीसगढ़ के 28वें जिले के रूप में गठित किया गया। यह जिला मुख्यतः पहाड़ी और वन-क्षेत्र से आच्छादित है।

सीमाएं

• उत्तर: मनेंद्रगढ़ (कोरिया जिला)

• दक्षिण: कोटा (बिलासपुर) और लोरमी (मुंगेली)

• पूर्व: कटघोरा (कोरबा जिला)

• पश्चिम: अनूपपुर जिला, मध्यप्रदेश (सोहागपुर और पुष्पराजगढ़ तहसील)

इस जिले का कुल क्षेत्रफल 2,307.39 वर्ग किलोमीटर है। जिले की लोक सभा क्षेत्र में कोरबा (04) और बिलासपुर (05) शामिल हैं, और विधान सभा क्षेत्र में मरवाही (24) और कोटा (25) आते हैं।

Kirana store in Gaurela Pendra Marwahi जैसे स्थानीय व्यवसाय इस जिले की आर्थिक जीवंतता को दर्शाते हैं।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में LPG गैस सेवा — Shree Sharda Gas Agency, Pendra

2. पर्वत और पठार: मैकल की गोद में

GPM जिला मैकल पर्वत श्रृंखला (Maikal Hills) की गोद में बसा है, जो सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का पूर्वी विस्तार है। यह पर्वत श्रृंखला विंध्याचल और सतपुड़ा से मिलकर एक विशाल पारिस्थितिकी तंत्र बनाती है।

यहां की ऊंचाई 200 मीटर से लेकर लगभग 1,000 मीटर तक है। जिले का औसत समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 602 मीटर है। पेंड्रा-लोरमी का पठार इस क्षेत्र की प्रमुख भू-आकृति है।

प्रमुख भौगोलिक संरचनाएं

• मैकल पर्वत श्रृंखला — सतपुड़ा का पूर्वी विस्तार

• पेंड्रा-लोरमी पठार — प्रमुख भू-आकृति

• खोडरी पहाड़ी — अरपा नदी का उद्गम स्थल

• बंजारी पहाड़ी — सोन नदी का उद्गम स्थल

• राजमेरगढ़ हिलटॉप — पर्यटन स्थल

मैकल पर्वत श्रृंखला एक जल-विभाजक (watershed) का कार्य करती है — यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बहने वाली नदियों को अलग करती है। इस पठारी क्षेत्र की मिट्टी में बॉक्साइट चट्टानें पाई जाती हैं।

Shree Sharda Gas Agency - LPG Gas Service in Pendra इस क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं प्रदान करती है।

3. नदियां: जीवनदायिनी जलधाराएं

GPM जिला कई प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल है। यहां से निकलने वाली नदियां अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों दिशाओं में प्रवाहित होती हैं, जो इस क्षेत्र की असाधारण भौगोलिक महत्ता को दर्शाता है।

नदी का नाम

उद्गम स्थल

लंबाई

विशेषता

अरपा नदी

गौरेला विकासखंड, खोडरी पहाड़ी

147 किमी

महानदी की सहायक नदी, बिलासपुर की जीवन रेखा

सोन नदी

पेंड्रारोड, बंजारी पहाड़ी

784 किमी

गंगा की प्रमुख सहायक नदी, उत्तर की ओर प्रवाह

मनियारी नदी

अचानकमार टाइगर रिजर्व

134 किमी

शिवनाथ नदी में मिलती है, वन क्षेत्र की जीवन रेखा

जोहिला नदी

अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर

180 किमी

सोन नदी की सहायक नदी

इसके अलावा खुड़िया नदी, लीलागर नदी की सहायक धाराएं भी इस जिले के वन क्षेत्रों से होकर प्रवाहित होती हैं। मलनिया (पकरिया) और गंगनई (साल्हेकोटा) जैसे बांध जल संग्रहण के लिए बनाए गए हैं, जो स्थानीय कृषि और पर्यटन के लिए उपयोगी हैं।

मरवाही में दैनिक आवश्यकताएं — Uday Dairy, Marwahi, GPM जिला

4. जंगल और वन्यजीव: हरे खजाने की धरती

GPM जिले का सबसे बड़ा गौरव है यहां स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व और अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व। यह जंगल छत्तीसगढ़ के सबसे घने और जैव-विविधता से भरपूर वन-क्षेत्रों में से एक है।

अचानकमार वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना 1975 में हुई और 2009 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।

वनस्पति

यहां की वनस्पति मुख्यतः उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती (Tropical Moist Deciduous) है। 600 से अधिक औषधीय पौधों की प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। बायोस्फीयर रिजर्व में 1,500 से अधिक पादप प्रजातियां और 151 से अधिक पादप परिवार दर्ज हैं।

• साल (Shorea robusta) — प्रमुख वन वृक्ष

• बीजा, सजा, हल्दू, सागौन, तिनसा, धवारा

• बांस के विशाल वन

• 600+ औषधीय पौधों की प्रजातियां

वन्यजीव

• बाघ (Tiger) — प्रोजेक्ट टाइगर के तहत संरक्षित

• तेंदुआ, गौर (बाइसन), सांभर, चीतल, नीलगाय

• जंगली कुत्ता, उड़न गिलहरी, सियार

• 150 से अधिक पक्षी प्रजातियां

यह रिजर्व बैगा जनजाति का भी घर है, जो एक विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) है। अचानकमार टाइगर रिजर्व कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर के माध्यम से मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से जुड़ा हुआ है, जो बाघों की आवाजाही और आनुवंशिक विविधता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

Desi Poultry Farm – Desi Murgi in GPM Parasi इस जिले के ग्रामीण कृषि और पशुपालन का एक उदाहरण है।

GPM परासी में देसी मुर्गी फार्म — GPM जिले का ग्रामीण जीवन

5. जैव मंडल रिजर्व: राष्ट्रीय महत्त्व

अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 3,835.51 वर्ग किलोमीटर है, जो छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में फैला है। इसे 2005 में भारत के 14वें बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था।

इसमें कोर जोन, बफर जोन और ट्रांजिशन जोन शामिल हैं। मैकल पर्वत श्रृंखला के साथ विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाएं इस बायोस्फीयर रिजर्व की सीमा के भीतर आती हैं।

यह बायोस्फीयर रिजर्व प्रायद्वीपीय भारत का एक प्रमुख जल-संग्रह क्षेत्र (watershed) है, जहां से नर्मदा, सोन और जोहिला जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम होता है।

Uday Dairy – Dairy & Daily Needs in Marwahi मरवाही क्षेत्र में स्थानीय जरूरतें पूरी करती है।

6. प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल

GPM जिले की भौगोलिक विशेषताओं ने यहां कई अद्भुत प्राकृतिक स्थलों को जन्म दिया है:

• दुर्गाधारा जलप्रपात — नदी द्वारा निर्मित सुंदर जलप्रपात

• लक्ष्मण धारा — प्राकृतिक जलस्रोत

• झोझा वॉटरफॉल (बस्ती) — पर्यटकों में लोकप्रिय

• सोनकुंड-सोनमुड़ा — सोन नदी का उद्गम स्थल

• थाथ पत्थर — अद्वितीय शैल संरचना

• जलेश्वरधाम — धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थल

• राजमेरगढ़ हिलटॉप — मैकल पर्वत का दृश्य बिंदु

• जोगी गुफा (लामना) — ऐतिहासिक गुफा

• पांडव गुफा (धनपुर) — पौराणिक महत्त्व

• गंगनई बांध, साल्हेकोटा — प्रकृति शिविर स्थल

Sandeep daily needs in Gaurela — गौरेला में पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की दैनिक जरूरतें पूरी करता है।

निष्कर्ष

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला छत्तीसगढ़ का एक अनमोल प्राकृतिक खजाना है। मैकल पर्वत की गोद में बसा यह जिला नदियों के उद्गम, घने साल के जंगलों और दुर्लभ वन्यजीवों की धरती है। अचानकमार टाइगर रिजर्व और अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व इस जिले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्त्व प्रदान करते हैं। यहां की भौगोलिक विशेषताएं न केवल पारिस्थितिकी की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं, बल्कि यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के पर्यटन, जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।

FAQs

प्रश्न

उत्तर

GPM जिले का गठन कब हुआ?

10 फरवरी 2020 को, बिलासपुर जिले से अलग होकर यह छत्तीसगढ़ का 28वां जिला बना।

GPM जिले में कौन-सी पर्वत श्रृंखला है?

मैकल पर्वत श्रृंखला, जो सतपुड़ा का पूर्वी विस्तार है।

जिले की प्रमुख नदियां कौन-सी हैं?

अरपा, सोन, मनियारी और जोहिला इस जिले की प्रमुख नदियां हैं।

अचानकमार टाइगर रिजर्व कब घोषित हुआ?

1975 में अभयारण्य और 2009 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।

GPM जिले की औसत ऊंचाई कितनी है?

यहां की ऊंचाई 200 मीटर से 1,000 मीटर तक है, औसत लगभग 602 मीटर।

बायोस्फीयर रिजर्व कितने क्षेत्र में फैला है?

अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 3,835.51 वर्ग किलोमीटर है।

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GPM Insights

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GPM जिले में वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधन

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) छत्तीसगढ़ का 28वाँ जिला है, जो घने साल वनों, अचानकमार टाइगर रिज़र्व और UNESCO मान्यता प्राप्त अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व के लिए जाना जाता है। यहाँ 2,307 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले जंगल, 1,500 से अधिक पादप प्रजातियाँ और बैगा जनजाति की समृद्ध वन संस्कृति इसे छत्तीसगढ़ की हरित धरोहर बनाती है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के नजदीकी शहर और जिले

GPM यानी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही छत्तीसगढ़ का 28वाँ जिला है जो 10 फरवरी 2020 को बना। यह जिला बिलासपुर, कोरबा, कोरिया, मुंगेली (छत्तीसगढ़) और अनूपपुर (मध्य प्रदेश) जिलों से घिरा हुआ है। नजदीकी प्रमुख शहरों में पेंड्रा (6 किमी), अनूपपुर (44 किमी) और बिलासपुर (79–110 किमी) शामिल हैं।

GPM जिले का भूगोल: पहाड़, जंगल और नदियां

छत्तीसगढ़ के 28वें जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की भौगोलिक विशेषताएं अद्वितीय हैं। 2,307 वर्ग किमी में फैला यह जिला मैकल पर्वत की गोद में बसा है, जहाँ से अरपा और सोन जैसी प्रमुख नदियाँ निकलती हैं और अचानकमार टाइगर रिजर्व के घने जंगल बाघ, गौर और 150 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर हैं।

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन का महत्व और कनेक्टिविटी

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन (कोड: PND) छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। SECR के बिलासपुर डिवीजन में स्थित इस स्टेशन पर 50 से अधिक ट्रेनें रुकती हैं और यह अचानकमार टाइगर रिजर्व का प्रवेश द्वार भी है।