छत्तीसगढ़ राज्य में नए जिले बनाने का सिलसिला निरंतर चलता रहा है। इसी क्रम में GPM जिला एक महत्वपूर्ण कदम है जो स्थानीय विकास और प्रशासनिक सुविधाओं को जनता के करीब लाने के उद्देश्य से बनाया गया। आइए जानते हैं कि GPM जिला क्या है, यह कब बना और इसे बनाने के पीछे के वास्तविक कारण क्या थे।

GPM जिला क्या है?
GPM छत्तीसगढ़ राज्य का एक नया और महत्वपूर्ण जिला है जो प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से भरपूर है। यह जिला राज्य के उत्तरी भाग में स्थित है और छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश की सीमा पर बसा है।
GPM का पूरा नाम क्या है?
GPM का पूरा नाम Gaurella-Pendra-Marwahi है। यह नाम तीन प्रमुख क्षेत्रों - Gaurella, Pendra और Marwahi को जोड़कर बनाया गया है। हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट पहचान है और इन तीनों को मिलाकर एक संतुलित और समावेशी प्रशासनिक इकाई बनाई गई है।
GPM जिला किस राज्य में स्थित है?

GPM जिला भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है। यह जिला छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसा है। उत्तर में Koriya जिला, दक्षिण में Bilaspur और Mungeli जिले, पूर्व में Korba जिला और पश्चिम में मध्य प्रदेश का Anuppur जिला इसकी सीमाओं को छूता है।
GPM जिले में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
GPM जिले में तीन तहसीलें और तीन ब्लॉक शामिल हैं - Gaurella, Pendra और Marwahi। जिले में कुल 223 गांव, 166 ग्राम पंचायतें और दो नगर पंचायतें (Gaurella और Pendra) हैं। जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 2307.39 वर्ग किलोमीटर है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से पहाड़ी और वनाच्छादित है, जहां बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है।
GPM जिला कब अस्तित्व में आया?
GPM जिले का गठन एक ऐतिहासिक घटना है जिसने स्थानीय लोगों की लंबे समय की मांग को पूरा किया।
GPM जिले की स्थापना की आधिकारिक तिथि
GPM जिला 10 फरवरी 2020 को आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने Gurukul Sports Complex, Pendra Road में आयोजित एक विशेष समारोह में इस नए जिले का उद्घाटन किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त 2019 को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस जिले के गठन की घोषणा की थी और ठीक पांच महीने और 25 दिन बाद यह घोषणा साकार हुई।
छत्तीसगढ़ का कौन सा नंबर का जिला है GPM?
GPM छत्तीसगढ़ का 28वां जिला है। यह जिला राज्य में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस जिले के बनने से छत्तीसगढ़ में कुल जिलों की संख्या 28 हो गई। यह क्षेत्र पहले Bilaspur जिले का हिस्सा था, लेकिन स्थानीय विकास और बेहतर प्रशासन के लिए इसे अलग जिला बना दिया गया।
जिला गठन के समय की प्रशासनिक स्थिति
जिले के गठन के समय, पूरे प्रशासनिक ढांचे को स्थापित किया गया। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के कार्यालयों का उद्घाटन किया गया। पहली जिलाधिकारी (कलेक्टर) के रूप में IAS अधिकारी शिखा सिंह राजपूत तिवारी को नियुक्त किया गया। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक विभागों की स्थापना की गई।
GPM को अलग जिला बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
GPM को अलग जिला बनाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण थे जो स्थानीय विकास और जनता की सुविधा से जुड़े हुए थे।
भौगोलिक दूरी और प्रशासनिक कठिनाइयां
GPM क्षेत्र Bilaspur जिला मुख्यालय से काफी दूर था। स्थानीय लोगों को सरकारी काम के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। यह क्षेत्र मुख्य रूप से पहाड़ी और जंगली इलाका है, जहां यातायात की सुविधाएं भी सीमित थीं। किसी भी प्रशासनिक कार्य के लिए 100 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करना आम बात थी, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी होती थी।
Bilaspur जिले से जुड़ी समस्याएं
Bilaspur एक बड़ा जिला था और GPM क्षेत्र इसके सबसे दूर और दुर्गम हिस्सों में से एक था। जिले के विशाल आकार के कारण प्रशासनिक निगरानी और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी नहीं हो पा रहा था। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्य धीमी गति से हो रहे थे। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या थी।
स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग
GPM को जिला बनाने का प्रस्ताव पहली बार 3 जुलाई 1998 में राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इसका मतलब है कि स्थानीय लोग लगभग 22 साल से इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे। यह स्थानीय निवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग और आकांक्षाओं को पूरा करने वाला निर्णय था। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम जनता ने निरंतर इस मांग को उठाया और अंततः 2020 में यह साकार हुआ।
GPM को अलग जिला बनाने के पीछे सरकार का उद्देश्य
राज्य सरकार ने GPM जिला बनाते समय कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों को ध्यान में रखा था।
प्रशासन को जनता के करीब लाना
नए जिले के गठन का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक सेवाओं को लोगों के करीब लाना था। अब GPM क्षेत्र के लोगों को किसी भी सरकारी काम के लिए Bilaspur जाने की आवश्यकता नहीं है। जिला मुख्यालय Gaurella में होने से स्थानीय लोगों को सभी प्रशासनिक सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो गई हैं। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है।
विकास योजनाओं को तेजी से लागू करना
एक अलग जिला बनने से विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तेज और प्रभावी हो गया है। अब जिले के लिए अलग से बजट आवंटन होता है और स्थानीय स्तर पर योजनाओं की निगरानी की जा सकती है। सड़क निर्माण, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में तेजी आई है। स्थानीय अधिकारी अब क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को बेहतर समझकर योजनाएं बना सकते हैं।
आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
GPM जिले में अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 57.09% है, जो एक बहुत बड़ा प्रतिशत है। सरकार का उद्देश्य इन जनजातीय समुदायों के विकास पर विशेष ध्यान देना था। जिले में Baiga जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) भी निवास करते हैं। अलग जिला बनने से इन समुदायों के लिए विशेष योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना आसान हो गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के क्षेत्र में जनजातीय कल्याण योजनाएं प्रभावी ढंग से चलाई जा रही हैं।

GPM जिला बनने से पहले की स्थिति
GPM जिला बनने से पहले इस क्षेत्र की स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण थी।
Bilaspur जिले के अंतर्गत GPM क्षेत्र
GPM क्षेत्र पहले Bilaspur जिले का एक हिस्सा था। Bilaspur एक विशाल जिला था जिसमें कई तहसीलें और ब्लॉक शामिल थे। GPM क्षेत्र जिले के सबसे उत्तरी और दुर्गम हिस्से में स्थित था। यह क्षेत्र मुख्य रूप से जंगली और पहाड़ी था, जहां विकास कार्य सीमित थे। प्रशासनिक ध्यान मुख्य रूप से जिले के शहरी और सुगम क्षेत्रों पर केंद्रित था।
विकास और सुविधाओं की सीमाएं
GPM क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी थी। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की अपर्याप्तता और सड़कों की खराब हालत आम समस्याएं थीं। जिले की साक्षरता दर केवल 55.92% थी, जो राज्य के औसत से कम थी। रोजगार के अवसर सीमित थे और युवाओं को काम की तलाश में दूसरे शहरों में जाना पड़ता था। कृषि और वन उपज ही आजीविका के मुख्य स्रोत थे।
स्थानीय प्रशासन की चुनौतियां
स्थानीय प्रशासन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। जिला मुख्यालय की दूरी के कारण त्वरित निर्णय लेना और आपातकालीन स्थितियों में तुरंत कार्रवाई करना मुश्किल था। कानून व्यवस्था बनाए रखने में भी कठिनाई होती थी। विकास योजनाओं की निगरानी प्रभावी नहीं हो पाती थी। जनता की शिकायतों का निवारण भी समय पर नहीं हो पाता था।
GPM जिला बनने के बाद क्या बदलाव आए?
नए जिले के गठन के बाद कई सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं।
प्रशासनिक सेवाओं में सुधार
अब GPM में पूर्ण जिला प्रशासन है। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य सभी विभागों के अधिकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हैं। लोगों को तहसील, न्यायालय, पुलिस स्टेशन और अन्य सरकारी कार्यालयों के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। दस्तावेज़ बनाना, जमीन से संबंधित काम और अन्य प्रशासनिक कार्य अब आसान और त्वरित हो गए हैं। जनता को प्रशासन से जुड़ाव महसूस होता है।
स्थानीय विकास कार्यों में तेजी
जिला बनने के बाद विकास कार्यों में उल्लेखनीय तेजी आई है। नई सड़कों का निर्माण, स्कूलों और अस्पतालों का विकास, बिजली और पानी की सुविधाओं में सुधार हो रहा है। जिला बनने के दिन ही Tikar, Gaurella में 14.97 करोड़ रुपये की लागत से बने 500 बेड के जनजातीय विकास विभाग छात्रावास का उद्घाटन किया गया। Gaurella-Kenvchi Road पर दो पुलों के निर्माण के लिए 3.48 करोड़ रुपये की योजना की भूमि पूजन भी की गई। ये सभी विकास कार्य स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं।
रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
नए जिले में सरकारी कार्यालयों की स्थापना से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। स्थानीय युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरियां मिल रही हैं। व्यापार और वाणिज्य में भी वृद्धि हुई है। जनजातीय छात्रावास, आश्रम शालाओं और शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाई जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए नए स्वास्थ्य केंद्र खोले जा रहे हैं। बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाएं भी अधिक सुलभ हो गई हैं।
GPM जिले का भविष्य और महत्व
GPM जिला छत्तीसगढ़ के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
क्षेत्रीय विकास की नई संभावनाएं
GPM जिला प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहां के जंगल, खनिज और कृषि योग्य भूमि विकास की अपार संभावनाएं प्रदान करते हैं। यह जिला गुणवत्तापूर्ण चावल और जनजातीय सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लिए न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत में प्रसिद्ध है। पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं क्योंकि यह क्षेत्र Amarkantak जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के निकट है। पर्यावरण पर्यटन, जनजातीय संस्कृति का प्रचार और कुटीर उद्योगों का विकास आर्थिक विकास के नए रास्ते खोल सकता है।
स्थानीय पहचान और आत्मनिर्भरता
GPM जिला बनने से स्थानीय लोगों में गर्व और आत्मविश्वास की भावना जागृत हुई है। अब वे अपने क्षेत्र के विकास में सीधे भागीदार हैं। स्थानीय जनजातीय समुदाय अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए आधुनिक विकास से जुड़ रहे हैं। वन उपज का सही मूल्य, परंपरागत कौशल का उपयोग और स्थानीय उत्पादों के विपणन से आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़ के विकास में GPM की भूमिका
GPM जिला छत्तीसगढ़ के संतुलित विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। यह क्षेत्र राज्य को मध्य प्रदेश से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण कड़ी है। Pendra Road रेलवे स्टेशन यातायात का एक प्रमुख केंद्र है। जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहर से समृद्ध यह जिला छत्तीसगढ़ की विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। शिक्षा और कौशल विकास में निवेश से यहां की जनजातीय युवा पीढ़ी राज्य और देश के विकास में सक्रिय भागीदार बन सकती है।
निष्कर्ष
GPM जिला बनने का वास्तविक कारण और प्रभाव
GPM जिला बनाने का मुख्य कारण था - प्रशासन को जनता के करीब लाना और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करना। 22 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद 10 फरवरी 2020 को यह सपना साकार हुआ। छत्तीसगढ़ के 28वें जिले के रूप में GPM का गठन केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान और उनके विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
Bilaspur जिले से अलग होकर बने इस नए जिले ने न केवल प्रशासनिक सुविधाओं को सुलभ बनाया है, बल्कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी लाई है। जनजातीय समुदायों को विशेष ध्यान देने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, रोजगार के अवसर पैदा करने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में यह जिला एक नई मिसाल बन रहा है।
GPM जिला यह साबित करता है कि जब प्रशासन जनता के करीब होता है, तो विकास की गति तेज होती है और लोगों का जीवन स्तर सुधरता है। तीन क्षेत्रों - Gaurella, Pendra और Marwahi - को एक साथ जोड़कर बनाया गया यह नाम विविधता में एकता का प्रतीक है। यह जिला भविष्य में छत्तीसगढ़ के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
आज GPM जिला न केवल एक प्रशासनिक इकाई है, बल्कि स्थानीय गौरव, सांस्कृतिक पहचान और विकास की आशा का प्रतीक बन गया है। यह जिला आने वाले वर्षों में निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के नक्शे पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाएगा।